शाहपुरा की विश्वप्रसिद्ध फड़ कला में सजी हल्दीघाटी की गाथा

BHILWARA
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विवेक जोशी ने रंगों में जीवंत किया महाराणा प्रताप का अदम्य शौर्य

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
राजस्थान की विश्वप्रसिद्ध शाहपुरा शैली की फड़ चित्रकला एक बार फिर इतिहास और संस्कृति के अद्भुत संगम की साक्षी बनी है। महाराणा प्रताप जयंती तथा हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर युवा फड़ कलाकार विवेक जोशी ने अपने रंगों और पारंपरिक शैली के माध्यम से हल्दीघाटी युद्ध के रोमांचकारी दृश्यों को जीवंत कर दिया है। यह चित्र केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि मेवाड़ की आन-बान-शान और वीरता की अमर गाथा का दृश्य दस्तावेज बन गया है।


विवेक जोशी, देश के प्रख्यात फड़ चित्रकार शांति लाल जोशी के सुपुत्र हैं। शांति लाल जोशी को राष्ट्रपति पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके द्वारा निर्मित फड़ चित्र आज भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों के संग्रहालयों, एयरपोर्ट, राजकीय भवनों और सांस्कृतिक संस्थानों की शोभा बढ़ा रहे हैं। सात सौ वर्षों से उनका परिवार शाहपुरा में रहकर इस पारंपरिक कला को उसकी मौलिकता और गरिमा के साथ आगे बढ़ा रहा है।
परिवार की इस समृद्ध कलात्मक विरासत को आगे बढ़ाते हुए विवेक जोशी के भाई विजय जोशी को भी हाल ही में माननीय राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उनकी हस्तनिर्मित चित्रकला राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट की गई, जिसने शाहपुरा की फड़ कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।
चित्र में सजी हल्दीघाटी की पूरी कथा–
विवेक जोशी ने बताया कि उनकी इस विशेष फड़ चित्रकारी में हल्दीघाटी युद्ध की प्रमुख घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से दर्शाया गया है। चित्र की शुरुआत उस प्रसंग से होती है, जब आमेर के राजा मानसिंह ने महाराणा प्रताप को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। महाराणा प्रताप स्वयं नहीं गए और अपने पुत्र अमर सिंह को भेजा। इसे मानसिंह ने अपना अपमान माना और कहा कि अब मुलाकात युद्धभूमि में ही होगी।
इसके बाद चित्र में हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध जीवंत हो उठता है। एक ओर महाराणा प्रताप अपनी वीर सेना के साथ हैं तो दूसरी ओर मानसिंह की विशाल मुगल सेना। युद्ध के सबसे प्रसिद्ध प्रसंग में महाराणा प्रताप अपने भाले से मानसिंह पर प्रहार करते दिखाई देते हैं, किंतु मानसिंह झुक जाने से बच जाते हैं। उसी दौरान हाथी की सूंड में लगी तलवार से महाराणा प्रताप का प्रिय अश्व चेतक गंभीर रूप से घायल हो जाता है।
चित्र में चेतक की स्वामीभक्ति का वह भावुक दृश्य भी दर्शाया गया है, जब घायल होने के बावजूद वह अपने स्वामी को सुरक्षित निकालते हुए पानी का दर्रा पार करता है। इसके साथ ही एक और मार्मिक प्रसंग चित्रित किया गया है, जिसमें महाराणा प्रताप के भाई शक्ति सिंह, जो उस समय मानसिंह की ओर से युद्ध कर रहे थे, अपने भाई की स्थिति देखकर पश्चाताप करते हैं और अंततः उनसे गले मिलते हैं। यह दृश्य केवल युद्ध नहीं, बल्कि रक्त संबंधों और आत्मसम्मान की भावना को भी अभिव्यक्त करता है।

700 वर्षों की परंपरा को नई पीढ़ी दे रही नई पहचान–
विवेक जोशी ने बताया कि यह वर्तमान चित्र एक अपेक्षाकृत छोटी फड़ है, जबकि इससे पहले वे हल्दीघाटी युद्ध पर 5 गुणा 12 फीट की विशाल फड़ चित्रकारी तैयार कर चुके हैं, जिसमें संपूर्ण युद्ध का विस्तृत चित्रण किया गया था। उनका उद्देश्य केवल चित्र बनाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय इतिहास, वीरता और राजस्थान की समृद्ध लोककला से जोड़ना है। शाहपुरा की फड़ कला सदियों से लोककथाओं, देवगाथाओं और ऐतिहासिक प्रसंगों को चित्रों के माध्यम से जीवंत करती रही है। विवेक जोशी की यह नई कृति उसी परंपरा की सशक्त कड़ी है, जो रंगों के माध्यम से इतिहास को वर्तमान से जोड़ते हुए आने वाले समय के लिए सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण कर रही है।