व्यक्ति के जीवन में गुरु का होना आवश्यकता है – डॉ. मिथलेश नागर

BHILWARA
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गंगापुर (दिनेश लक्षकार)

नगर में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के दौरान आज छठे दिवस कथा वाचक पंडित डॉ.मिथिलेश नागर ने कहा कि ईश्वर की कृपा अगर हमें प्राप्त करनी हैं तो उससे पहले हमारे जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि गुरु वह शक्ति है जो आपके ज्ञान के नेत्रों को खोलकर भगवान की कृपा आपके जीवन में प्राप्त करवा सकती है। गुरु के बिना इस भवसागर में हमारी मौजूदगी बिना मल्हार की नौका के समान रहती है जिसमें हम जीवन भर चलते जाते हैं लेकिन मंजिल का पता नहीं चल पाता है। अगर हमारे जीवन में गुरु होगा तो हमें मंजिल पर पहुंचने का रास्ता भी गुरु के द्वारा ही दिखाया जाएगा।

कथा के दौरान गिरिराज गोवर्धन एवं छप्पन भोग के कार्यक्रम में डॉ. नागर ने विस्तृत वर्णन करते बताया कि गिरिराज गोवर्धन को सबसे छोटी उंगली कनिष्ठा उंगली पर उठाया गया इसके पिछे कारण यह था कि समाज का सबसे छोटा तबका भी बड़े कार्य करने में समर्थ रहता है।  इसलिए हमें जाति पाती को भूलाकर के सामाजिक समरसता का भाव मन में स्थापित करना चाहिए। महारास लीला,कंस वध आदि कथाओं का वर्णन भी कथा के दौरान किया गया । कथा में यह भी बताया गया कि द्वारकाधीश बनने से पहले भगवान श्री कृष्ण ने अपने जीवन में कर्म को महत्व दिया तभी वह द्वारकाधीश बने और द्वारिका के सिंहासन पर बैठने के लिए बलराम ने कृष्ण का नाम सभी के सामने प्रस्तुत किया। कथा में आज सहाड़ा विधायक लादूलाल पितलिया ने भी गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त कर व्यास पीठ का पूजन किया।आज कथा का अंतिम दिवस में कथा का समय 12:00 बजे रहेगा उसके पश्चात भोजन प्रसादी भंडारे का आयोजन रहेगा।