रसद अधिकारियों का ‘खेल’: सही रिपोर्ट को किया गायब, कूट रचित दस्तावेजों से किया लाइसेंस निलंबित, पीड़ित ने कलेक्टर से लगाई गुहार

BHILWARA
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जिला कलेक्टर ने दिया निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का भरोसा

*पुनित चपलोत*
भीलवाड़ा (खामोर) // रसद विभाग के अधिकारियों द्वारा कथित रूप से फर्जी और कूट रचित दस्तावेज तैयार कर दुकान का लाइसेंस निष्पादित करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में पीड़ित दुकानदार ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई है और दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की मांग की है।



खामोर (शाहपुरा) निवासी ओमप्रकाश वैष्णव ने मीडिया को बताया कि गत 29 अक्टूबर को रसद विभाग की टीम ने उनकी दुकान का निरीक्षण किया था। इस जांच के दौरान टीम को किसी भी प्रकार की अनियमितता या कमी नहीं मिली थी। मौके पर दो प्रतियों में फर्द मौका और निरीक्षण दस्तावेज तैयार किया गया था, जिस पर दुकानदार और वहां मौजूद दो स्वतंत्र गवाहों के कानून हस्ताक्षर भी करवाए गए थे

दुकानदार का आरोप है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने कार्यालय पहुंचकर डीएसओ (DSO) या किसी अन्य राजनेता के कथित दबाव में आकर मूल निरीक्षण प्रपत्र में हेरफेर कर दिया। फर्जी तरीके से नया प्रपत्र तैयार कर उसमें गंभीर अनियमितताओं के झूठे आरोप जोड़ दिए गए और इसी के आधार पर उनकी दुकान को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया।

हाईकोर्ट से केविअट नोटिस मिलने के बाद जब पीड़ित ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रमाणित प्रतियां (सर्टिफाइड कॉपियां) प्राप्त कीं, तो उनके होश उड़ गए। मौके पर तैयार की गई फर्द गायब थी और उसकी जगह कूट रचित दस्तावेज शामिल थे। पीड़ित ने इसकी निजी स्तर पर एफएसएल (FSL) जांच भी करवाई और गत २ दिसंबर को फूलिया कलां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। हालांकि, पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने और अधिकारियों द्वारा उनके खिलाफ राजकार्य में बाधा व एसटी-एससी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने के बाद मामला और पेचीदा हो गया, जिस पर दुकानदार हाईकोर्ट से स्टे लेकर आए हैं।


शाहपुरा न्यायालय की शरण लेने के बाद अदालत ने अब फूलिया कलां थाना पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर कानूनी अनुसंधान करने के आदेश दिए ।पुलिस ने सोमवार को न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया। इसी क्रम में मंगलवार को पीड़ित ओमप्रकाश वैष्णव ने जिला कलेक्टर को इस पूरे प्रकरण से अवगत कराते हुए एक ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष विभागीय जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने का भरोसा दिलाया है।