*यूआईटी लॉटरी प्रकरण में मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन, 90 हजार आवेदकों को न्याय दिलाने की मांग*

BHILWARA
Spread the love



*जांच रिपोर्ट, आवेदक सूची और अभिलेख सार्वजनिक करने की मांग; सात दिन में कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध जनआंदोलन की चेतावनी।*

भीलवाड़ा, 21 जुलाई। नगर विकास न्यास (यूआईटी), भीलवाड़ा द्वारा 16 अक्टूबर 2025 को आयोजित 3081 भूखण्डों की विवादित लॉटरी में कथित अनियमितताओं को लेकर सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी हेमेन्द्र शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता राघव कोठारी, बृजेश पारीक, पवन त्रिपाठी, रितेश गुर्जर सहित 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर कार्यालय, भीलवाड़ा में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट डॉ. हरीतिमा को माननीय मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा।



ज्ञापन में यूआईटी लॉटरी प्रकरण की जांच समिति की संपूर्ण रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करने, लगभग 90,000 आवेदकों की संपूर्ण आवेदन सूची, पात्र एवं निरस्त आवेदनों का रिकॉर्ड तथा लॉटरी प्रक्रिया से संबंधित समस्त सार्वजनिक अभिलेख उपलब्ध कराने की मांग की गई। साथ ही विवादित लॉटरी के दौरान प्रभारी रहे AEN श्री रविश श्रीवास्तव को जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण होने तक नगर विकास न्यास, भीलवाड़ा से पदमुक्त करने का भी आग्रह किया गया।



प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि यह प्रकरण वर्तमान में माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत मांगे गए अभिलेखों के संबंध में सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के बावजूद यूआईटी द्वारा दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

ज्ञापन में मांग की गई कि यदि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया में किसी अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका स्थापित होती है तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। यदि लॉटरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो विवादित लॉटरी को निरस्त कर पात्र आवेदकों को समान अवसर प्रदान करते हुए पूर्णतः पारदर्शी एवं निष्पक्ष नई लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह केवल 3081 भूखण्डों का विषय नहीं, बल्कि लगभग 90,000 परिवारों के विश्वास, पारदर्शिता, सुशासन एवं प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न है। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से जनहित में त्वरित एवं प्रभावी निर्णय लेने का आग्रह करते हुए स्पष्ट किया गया कि यदि सात दिवस के भीतर मांगों पर उचित कार्यवाही प्रारंभ नहीं की जाती है, तो प्रभावित आवेदकों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा चरणबद्ध लोकतांत्रिक जनआंदोलन प्रारंभ किया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।

ज्ञापन सौंपने वालों में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी हेमेन्द्र शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता राघव कोठारी, एडवोकेट नृपेन्द्र सिंह राणावत, बृजेश पारीक, नवीन शर्मा, पवन त्रिपाठी, रितेश गुर्जर, हिमांशु शुक्ला, अभिषेक केडिया, दीपक कुमावत, अशोक शर्मा (जहाजपुर) एवं ललित देवनानी उपस्थित रहे।

जारीकर्ता
समस्त प्रभावित आवेदक एवं न्यायप्रिय नागरिक, भीलवाड़ा