47 युवाओं ने धारण किया यज्ञोपवीत, वैदिक मंत्रों से गूंजा मुनिकुल ब्रह्मचर्याश्रम

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40 नवप्रवेशित बटुकों का उपनयन संस्कार, गायत्री पुरश्चरण शुरू; आज से संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का होगा शुभारंभ

बड़लियास ( रोशन वैष्णव)
। सनातन संस्कृति और वैदिक परंपरा के संरक्षण का अद्भुत दृश्य बुधवार को श्री मुनिकुल ब्रह्मचर्याश्रम वेद संस्थानम्, बरूंदनी में देखने को मिला। पांच दिवसीय धार्मिक आयोजन के दूसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच 40 नवप्रवेशित बटुकों सहित 7 अन्य युवाओं का यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार विधि-विधान से संपन्न कराया गया। इसके साथ ही सभी बटुकों के लिए गायत्री पुरश्चरण का शुभारंभ हुआ। पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण छाया रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने।
संस्था प्रधान पंडित मुरलीधर पंचोली ने बताया कि भारतीय संस्कृति में वर्णित सोलह संस्कारों में यज्ञोपवीत संस्कार का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसी उद्देश्य से वेद, कर्मकांड एवं पौरोहित्य की शिक्षा ग्रहण करने वाले 40 नवीन विद्यार्थियों का वैदिक परंपरा के अनुरूप उपनयन संस्कार कराया गया। उन्होंने बताया कि संस्कार के साथ ही गायत्री पुरश्चरण प्रारंभ कर विद्यार्थियों के आध्यात्मिक एवं वैदिक जीवन की नई यात्रा का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम में प्रख्यात ज्योतिषाचार्य श्री गोपाल त्रिपाठी ने बटुकों को धर्म, संस्कार और भारतीय संस्कृति की महत्ता बताते हुए कहा कि यज्ञोपवीत केवल एक धागा नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासन, ज्ञान, सेवा और सदाचार से जोड़ने वाला पवित्र संस्कार है।
यज्ञोपवीत संस्कार की संपूर्ण वैदिक प्रक्रिया आचार्य रतन शर्मा, हरिशंकर पालीवाल, नीलाम्बर त्रिपाठी, सुरेश तिवारी एवं उदयलाल जोशी के निर्देशन में संपन्न हुई।
इस अवसर पर महंत श्री श्री 1008 राम रंगीला दास जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सनातन धर्म की जड़ें संस्कारों से मजबूत होती हैं। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, वेदों और धर्म के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
संस्था उपाध्यक्ष वेणुगोपाल पंचोली ने वेदों में वर्णित यज्ञोपवीत की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्कार व्यक्ति को ज्ञान, संयम और कर्तव्य के मार्ग पर अग्रसर करता है।
कार्यक्रम में संस्था अध्यक्ष राधेश्याम पंचोली, वेद विद्यालय प्राचार्य कैलाश चंद्र जोशी, उपप्राचार्य हरीश शर्मा, महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. बृजमोहन शर्मा, वरिष्ठोपाध्याय प्राचार्य बृजमोहन शर्मा, गोविंद शर्मा, महेंद्र शर्मा, नारायण जोशी, गोविंद प्रसाद, राकेश जोशी, रणछोड़ तिवारी, बनवारी शर्मा, पुष्कर पंचोली, बंटू जी, उमाकांत जोशी, महेशकांत पंचोली, रामनारायण शर्मा सहित संस्था के पदाधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आज से बरसेगा श्रीमद्भागवत कथा का अमृत
धार्मिक आयोजन के अगले चरण में 23 जुलाई से प्रतिदिन रात्रि 8 से 11 बजे तक संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन होगा। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण भक्ति, धर्म और भारतीय संस्कृति का संदेश मिलेगा। आयोजन समिति ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने की अपील की।