जाम में फंसा डिलीवरी महिला का वाहन, स्कूली बच्चों पर भी संकट
मेहरू कलां
क्षेत्र के मुख्य मार्ग पर बजरी से भरे डंपर और ट्रोलों की अनियंत्रित आवाजाही ने ग्रामीणों का जीवन दूभर कर दिया है। रोजाना लगने वाले जाम से हालात ऐसे हो गए हैं कि आमजन से लेकर मरीज और स्कूली बच्चे तक गंभीर परेशानी झेल रहे हैं।
स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में एक गर्भवती (डिलीवरी) महिला को अस्पताल ले जाते समय वाहन जाम में फंस गया, जिससे परिजनों की सांसें अटक गईं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बीमार व्यक्तियों को ले जाने वाले वाहन भी जाम में अटक जाते हैं, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है। छोटी दूरी तय करने में भी लोगों को लंबा समय लग रहा है।
इस मार्ग पर 4 से 5 विद्यालय संचालित हैं, जहां प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं आवागमन करते हैं। भारी वाहनों की तेज रफ्तार और जाम की स्थिति ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार भय का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार डंपर और ट्रोले तेज गति से गुजरते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा हर समय बना रहता है। संकरी सड़क पर जब दो बड़े वाहन आमने-सामने आ जाते हैं, तो पूरा मार्ग ठप हो जाता है और लंबा जाम लग जाता है।
समस्या से त्रस्त ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग करते हुए भारी वाहनों के लिए अलग बायपास मार्ग बनाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि डंपरों के लिए अलग रास्ता बना दिया जाए, तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक जागता है और राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।
