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अधिक मास में सेवा का संकल्परू रामनिवास धाम में 25 जरूरतमंद परिवारों को राशन किट वितरित


शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
रामस्नेही संप्रदाय की मुख्यपीठ रामनिवास धाम शाहपुरा में सेवा और मानव कल्याण की परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है। धाम में संचालित मासिक राशन सहायता योजना के तहत जून 2026 में 25 जरूरतमंद परिवारों को राशन सामग्री का वितरण किया गया। अधिक मास के पावन अवसर पर आयोजित इस सेवा कार्य में जरूरतमंद परिवारों को दैनिक उपयोग की आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिससे उनके परिवारों को राहत मिली।
रामद्वारा के कार्यवाहक भंडारी संत श्री नवनिध राम जी की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम में इस माह की राशन सामग्री का संपूर्ण सहयोग बड़नगर (मध्यप्रदेश) निवासी डॉ. वासुदेव काबरा एवं उनके पुत्र डॉ. प्रखर काबरा परिवार की ओर से किया गया। काबरा परिवार ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए सहयोग प्रदान किया।
संत नवनिधराम महाराज ने बताया कि रामनिवास धाम में पिछले कई समय से प्रत्येक माह 25 आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राशन सामग्री उपलब्ध कराने की सेवा योजना संचालित की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य समाज के उन लोगों तक सहयोग पहुंचाना है, जिन्हें समय-समय पर आवश्यक सहायता की जरूरत होती है। धाम की यह पहल सेवा, परोपकार और सामाजिक समरसता का संदेश भी दे रही है।
अधिक मास को सनातन परंपरा में दान, पुण्य और सेवा का विशेष महत्व प्राप्त है। ऐसे पावन अवसर पर किए गए इस सेवा कार्य को उपस्थित श्रद्धालुओं ने अत्यंत प्रेरणादायी बताया। लाभार्थी परिवारों ने भी इस सहयोग के लिए रामनिवास धाम और सहयोगी परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।
रामनिवास धाम की ओर से डॉ. वासुदेव काबरा, डॉ. प्रखर काबरा एवं पूरे काबरा परिवार को इस पुण्य कार्य के लिए साधुवाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना की गई। धाम के संतों ने कहा कि समाज में संपन्न वर्ग यदि इसी प्रकार जरूरतमंदों के सहयोग के लिए आगे आता रहे, तो अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान कैलाशचंद्र तोषनीवाल, सूर्यप्रकाश बिड़ला, राकेश सोमाणी सहित कई श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने सेवा कार्य में सहयोग देने वाले परिवार का अभिनंदन किया और इसे समाज के लिए अनुकरणीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों से केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा की ऐसी प्रेरणाएं भी समाज को नई दिशा देती हैं।

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