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युवा राष्ट्र का भविष्य लेकिन दिशा आवश्यक-डॉ शंकर लाल माली



आसींद। संघ शताब्दी वर्ष के छठे कार्यक्रम युवा आधारित कार्यक्रम में सरेरी खंड के करजालिया मंडल के दुल्हेपुरा में युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह डॉ शंकर लाल माली ने बताया कि युवा किसी भी देश का भविष्य होता है  बशर्तें उनकी दिशा सही होनी चाहिए,युवा हवा का एक प्रवाह है,जो निरंतर चलता रहता हैं पर सही दिशा होने पर उसके मन में अपने परिवार व राष्ट्र के प्रति समर्पण  त्याग का भाव आता हैं।

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भारतीय वैदिक काल से जड़ व चेतन को मानने वाला हैं भारत का युवा अपने लिए नहीं अपनों के लिए जीने वाला होना चाहिए़,भारतीय संस्कृति को जीवंत एक पीढी से दूसरी पीढ़ी में रखने हेतु हम विभिन्न लोक कलाकारों द्वारा किए गए खेलो नाटको जिसमें राजा हरिश्चंद्र राजा भर्तृहरि के जीवन से समर्पण सीख सकते हैं। भारत का युवा भारत को जानने मानने भारत जैसा बनने और बनाने वाला होना चाहिए। भारत का विचार सनातन परंपरा का विचार हैं जो विश्व कल्याण में विश्वास रखता हैं। विश्व के अनेक देश दूसरे देशों का शोषण करने में विश्वास रखते हैं जिसे दुनिया में अशांति पैदा होती है जबकि भारत सभी के पोषण में विश्वास रखता है इसलिए हम धरती जीव जंतु आदि के कारण पोषण की व्यवस्था हमारे शास्त्रों से सीखते हैं।

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डाॅ माली ने अपने 70 मिनट के उद्बोधन में उन स्वातंत्र्य वीरो व क्रांतिकारी का भी वर्णन किया जिन्होंने भारत माता के स्वाधीनता हुए खुशहाली हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर किया। अब हम सब युवाओं का कर्तव्य बनता है कि हम किस प्रकार विदेशी ताकतों के बहकावे में नहीं आकर इस भारत को संपूर्ण वैभव से परिपूर्ण बनाने में अपनी ऊर्जा लगाएं। साथ ही रसायन मुक्त जैविक खेती पर्यावरण संतुलन और संविधान प्रदत्त अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी चिंतन करें तभी हमारा जीवन सार्थक होगा और सशक्त राष्ट्र बनेगा।

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