बिजोलिया । (नरेश धाकड़)
श्री राम जानकी प्राण प्रतिष्ठा को लेकर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मंगलवार रात्रि को संगीतमय सुंदरकांड पाठ का भव्य आयोजन किया गया। देर शाम से शुरू हुए इस आयोजन में गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पंहुचे । भक्ति, संगीत और श्रद्धा से ओतप्रोत वातावरण में पूरा गांव राममय हो उठा।

कार्यक्रम में डॉ. पंडित मिथिलेश नागर ने सुंदरकांड के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुंदरकांड का श्रवण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मनोबल बढ़ता है और संकटों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने बताया कि सुंदरकांड सुनने से भय, रोग, तनाव और बाधाओं का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।


सुंदरकांड, रामचरितमानस का एक महत्वपूर्ण कांड है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की। इसमें हनुमान जी की वीरता, बुद्धिमत्ता और प्रभु श्री राम के प्रति उनकी अटूट भक्ति का सजीव वर्णन मिलता है। लंका प्रस्थान से लेकर माता सीता से भेंट, विभीषण से संवाद, लंका दहन और पुनः श्री राम के पास लौटने तक की घटनाओं का भावपूर्ण पाठ श्रोताओं को भाव-विभोर कर गया।

संगीतमय पाठ के दौरान भजनों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। कई बार “जय श्री राम” और “हनुमान जी की जय” के गगनभेदी जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
कार्यक्रम के समापन पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।
