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अम्बेडकर दृष्टि से समता का संदेश, युवाओं को दिया सामर्थ्य का आह्वानएमडीएसयू में राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन, जुटे विद्वान व विद्यार्थीविधायक डॉ. लालाराम बैरवा बोले-समरस समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव


बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का किया आह्वान

शाहपुरा मूलचन्द पेसवानी
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (एमडीएसयू) अजमेर स्थित अम्बेडकर शोधपीठ के तत्वावधान में “अम्बेडकर दृष्टि समता से सामर्थ्य” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शाहपुरा विधायक एवं विश्वविद्यालय के प्रबंध मंडल (बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट) के सदस्य डॉ. लालाराम बैरवा ने भाग लिया और सामाजिक समरसता के महत्व पर जोर दिया।


संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. लालाराम बैरवा ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचार केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक समतामूलक, सशक्त और विकसित समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने “समता से सामर्थ्य” के मूल मंत्र को स्पष्ट करते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षित बनकर समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने का संकल्प लें।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में जसवंत खत्री (क्षेत्रीय कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राजस्थान) ने बाबा साहेब के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं। उन्होंने सामाजिक एकता और राष्ट्रीय चेतना के संदर्भ में अम्बेडकर के योगदान को रेखांकित किया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश अग्रवाल ने की। उन्होंने अम्बेडकर शोधपीठ के शैक्षणिक उद्देश्यों और सामाजिक सरोकारों की जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। वहीं मानद निदेशक प्रोफेसर शिव प्रसाद ने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला और इसे वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव कैलाश चन्द्र शर्मा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। समापन अवसर पर डॉ. लालाराम बैरवा ने अम्बेडकर शोधपीठ द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए मीडिया से बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

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