अवैध बजरी खनन पर प्रशासनिक अमला उतरा मैदान में, ग्रामीणों की मौजूदगी में नदी किनारों की हुई पड़ताल
शाहपुरा, मूलचन्द पेसवानी
फूलियाकलां क्षेत्र की जीवनदायिनी खारी और मानसी नदी में कथित अवैध बजरी खनन के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त निर्देशों के बाद सोमवार को संयुक्त जांच टीम फूलियाकलां पहुंची, जहां नदी क्षेत्रों में खनन गतिविधियों की गहन पड़ताल शुरू की गई। प्रशासनिक अमले की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई और ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई।
जांच टीम में जिला कलेक्टर प्रतिनिधि के रूप में शाहपुरा एडीएम प्रकाशचंद्र रेगर, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि सहित पुलिस एवं प्रशासन के कई आला अधिकारी शामिल रहे। टीम ने खारी और मानसी नदी के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण कर मौके की स्थिति देखी तथा खनन गतिविधियों से जुड़े तथ्यों को खंगाला।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले को लेकर हबीब मोहम्मद नीलगर ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि लीज धारक द्वारा पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करते हुए दोनों नदियों में बड़े पैमाने पर अवैध बजरी खनन किया जा रहा है। शिकायत में नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़, पर्यावरण संतुलन बिगड़ने और जलधारा प्रभावित होने जैसी गंभीर बातें भी उठाई गई थीं।
एनजीटी द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त जांच के आदेश दिए गए, जिसके बाद प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आई। जांच के दौरान ग्रामीणों ने भी नदी क्षेत्र में हो रहे कथित अवैध खनन को लेकर नाराजगी जताई और कार्रवाई की मांग की।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि खारी और मानसी नदी केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके की जीवनरेखा हैं। यदि नदियों में अनियंत्रित बजरी दोहन जारी रहा तो भविष्य में जल संकट और पर्यावरणीय नुकसान गहराने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब सबकी नजर संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि आरोप सही पाए गए तो अवैध बजरी कारोबार पर बड़ी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
