“17 बार टूटा, फिर भी अडिग खड़ा रहा सोमनाथ”
राजकीय महाविद्यालय में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर युवाओं को बताया गौरवशाली इतिहास
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय में रविवार को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हर्षोल्लास और राष्ट्रीय चेतना के माहौल में मनाया गया। कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. पुष्कर राज मीणा की अध्यक्षता तथा वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. मूलचंद खटीक के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित हुआ। अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. पुष्कर राज मीणा ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रीय स्वाभिमान, सांस्कृतिक चेतना और अदम्य संघर्ष का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि चंद्रदेव ने भगवान शिव की आराधना के बाद सबसे पहले स्वर्ण निर्मित सोमनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। उन्होंने कहा कि इतिहास में इस मंदिर को कई बार आक्रमणकारियों ने तोड़ा, लूटा और रक्तपात किया, लेकिन हर बार यह पहले से अधिक भव्य स्वरूप में पुनः खड़ा हुआ।
उन्होंने बताया कि 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर आक्रमण कर भारी लूटपाट और नरसंहार किया था। इसके बाद भी राजा भीमदेव और राजा भोज सहित कई शासकों ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। वहीं आधुनिक भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प और जनसहयोग से वर्तमान भव्य सोमनाथ मंदिर का निर्माण हुआ, जिसे 11 मई 1951 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्र को समर्पित किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. मूलचंद खटीक ने कहा कि 12 ज्योतिर्लिंग भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर हैं और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने युवाओं से भारतीय इतिहास और संस्कृति को आत्मसात करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में संकाय सदस्य प्रो. दिग्विजय सिंह ने आभार व्यक्त किया। समारोह में प्रो. दलवीर सिंह, प्रो. अतुल कुमार जोशी, महाविद्यालय स्टाफ एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।
