शहरभर में लगेंगे हजारों परिंडे, “परिंडे वाले बाबा” की मुहिम बनी जनआंदोलन
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
भीषण गर्मी, तपती धूप और आसमान से बरसती आग के बीच जहां इंसान खुद को बचाने के लिए ठंडी जगह तलाश रहा है, वहीं शाहपुरा में युवाओं की एक टोली बेजुबान पक्षियों और वन्य जीवों की जिंदगी बचाने के मिशन में दिन-रात जुटी हुई है। शहर की अग्रणी संस्था जीव दया सेवा समिति का “परिंडे लगाओ, बेजुबान पक्षियों को बचाओ” अभियान अब सिर्फ एक सामाजिक पहल नहीं, बल्कि जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
शहर के प्रमुख चैराहों, धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक स्थानों, सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों और मुख्य मार्गों पर इस वर्ष हजारों परिंडे लगाने की तैयारी की जा रही है ताकि भीषण गर्मी में कोई भी पक्षी प्यासा न रहे। सुबह से लेकर देर शाम तक युवाओं की टीम परिंडों में पानी भरने, दाना डालने और उनकी साफ-सफाई की जिम्मेदारी निभा रही है।
अभियान के तहत कोर्ट परिसर के सामने एलआर मार्केट क्षेत्र में परिंडे लगाए गए। इस दौरान व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष लालूराम जागेटिया, पूर्व पालिका अध्यक्ष कन्हैयालाल धाकड़, गीतकार सत्येंद्र मंडेला, पूर्व पार्षद भगवान सिंह यादव, गोपाल घुसर, नरेश व्यास, नवरत्न चैधरी, कवि दिनेश बंटी, जीव दया सेवा समिति संयोजक अतू खां कायमखानी, पूर्व पार्षद डॉ. ईशाक मोहम्मद, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी शंकरलाल जोशी, सुनील शर्मा और प्रहलाद सुथार सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
समिति संयोजक अतू खां कायमखानी ने बताया कि फुलिया गेट के बाहर दरगाह अजीम अली सरकार नूर बाग सहित शहर के कई इलाकों में लगाए गए परिंडों में कौवा, कोयल, गौरैया, टिटहरी, गिलहरी सहित अनेक बेजुबान जीव अपनी प्यास बुझा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत वर्षों पहले महज 100 परिंडों से की गई थी, लेकिन आज यह संख्या हजारों तक पहुंच चुकी है।
कायमखानी ने भावुक अंदाज में कहा कि शुरुआत में लोग मजाक उड़ाते थे और कहते थे कि “ढिबरे बांटते फिर रहे हैं”, लेकिन सेवा का यह कारवां रुकने के बजाय लगातार बढ़ता गया। आज गांव-गांव और शहर-शहर में “परिंडे लगाओ, बेजुबान पक्षियों को बचाओ” का संदेश गूंज रहा है। अफसरों से लेकर मजदूरों तक और हर वर्ग के लोग इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। लोगों ने प्यार से अतू खां कायमखानी को अब “परिंडे वाले बाबा महाराज” कहना शुरू कर दिया है।
जीव दया सेवा समिति पिछले करीब 20 वर्षों से जीव दया, पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीव सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। समिति अब तक सैकड़ों घायल और बीमार वन्य जीवों तथा बेजुबान पशुओं का रेस्क्यू कर उनका उपचार करवा चुकी है। मोर, हिरण, खरगोश, साइबेरियन सारस, नीलगाय और प्रवासी पक्षियों सहित कई वन्य जीवों को सुरक्षित आश्रय और नया जीवन देने में समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
समिति को समय-समय पर राज्य सरकार, जिला प्रशासन और तहसील स्तर पर उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है। प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, सभी धर्मों के धर्मगुरुओं और आम नागरिकों का भी समिति को लगातार सहयोग और आशीर्वाद मिलता रहा है।
जीव दया सेवा समिति केवल परिंडे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी लगातार सक्रिय है। हर वर्ष वृक्षारोपण, पौधों की देखरेख, कुओं-तालाबों और बावड़ियों की सफाई, जल स्रोतों से अतिक्रमण हटवाने, पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे अनेक सामाजिक कार्य किए जाते हैं।
संयोजक अतू खां कायमखानी ने कहा कि यह सेवा कार्य अब उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। हर सुबह एक नया लक्ष्य लेकर निकलते हैं और यही कोशिश रहती है कि कोई भी बेजुबान जीव भूखा-प्यासा न रहे। गुरुजनों, समाज और मित्रों के आशीर्वाद से सेवा का यह कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है।
भीषण गर्मी के इस दौर में शाहपुरा की जीव दया सेवा समिति मानवता, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का ऐसा संदेश दे रही है, जो समाज के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है। युवाओं की यह टोली साबित कर रही है कि यदि संवेदनाएं जिंदा हों तो बेजुबानों की जिंदगी भी मुस्कुराने लगती है।
