भीलवाड़ा के टंकी के बालाजी मुक्तिधाम में लगा अत्याधुनिक अंत्येष्टि यंत्र
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल, मात्र 100 किलो लकड़ी में होगा दाह संस्कार
समाजसेवी नारायण लड्ढा के सहयोग से 5 लाख की लागत से स्थापित हुई आधुनिक शवदाह भट्टी
भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी
पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के सदुपयोग की दिशा में भीलवाड़ा के टंकी के बालाजी मुक्तिधाम में शनिवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब यहां अंतिम संस्कार के दौरान लकड़ी की खपत में भारी कमी आएगी। मुक्तिधाम परिसर में अत्याधुनिक सुधारित लकड़ी आधारित शवदाह भट्टी (अंत्येष्टि यंत्र) स्थापित की गई है, जिससे दाह संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी में लगभग 75 प्रतिशत तक बचत संभव होगी।

मुक्तिधाम के संरक्षक बाबूलाल जाजू एवं सचिव नवनीत सोमानी ने बताया कि यह आधुनिक अंत्येष्टि यंत्र समाजसेवी एवं समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नारायण लड्ढा के सहयोग से करीब 5 लाख रुपये की लागत से स्थापित किया गया है। यह तकनीक पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और अंतिम संस्कार की विधियों को अक्षुण्ण रखते हुए पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में एक दाह संस्कार के लिए लगभग 400 किलोग्राम लकड़ी की आवश्यकता होती है, लेकिन इस नवीन तकनीक के उपयोग से मात्र 100 किलोग्राम लकड़ी में ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी। इससे न केवल लकड़ी की बचत होगी, बल्कि पेड़ों की कटाई पर भी अंकुश लगेगा और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
समिति पदाधिकारियों के अनुसार यह अंत्येष्टि यंत्र आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संस्कारों का बेहतरीन समन्वय है। इसके माध्यम से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित, सुविधाजनक और प्रभावी बनेगी। मुक्तिधाम में आने वाले शोकाकुल परिवारों को भी बेहतर व्यवस्थाओं का लाभ मिलेगा।
इस अवसर पर मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष बनवारीलाल मुरारका, कोषाध्यक्ष राकेश दरक, उपाध्यक्ष सुनील जागेटिया, धर्मराज खंडेलवाल, दीपक मेलाना तथा प्रदीप चैधरी सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
वहीं मुक्तिधाम व्यवस्था प्रभारी सुरेश कचोलिया, मनोहर अजमेरा एवं उमाशंकर शर्मा ने अंत्येष्टि यंत्र के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने का संकल्प लिया।
समिति के अध्यक्ष बनवारीलाल मुरारका, संरक्षक बाबूलाल जाजू और सचिव नवनीत सोमानी सहित कार्यकारिणी सदस्यों ने समाजसेवी नारायण लड्ढा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से यह जनहितकारी कार्य संभव हो पाया है। उन्होंने बताया कि मुक्तिधाम में भविष्य में भी विभिन्न विकास कार्यों को गति दी जाएगी, जिससे यहां आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
उल्लेखनीय है कि नजर में यह पहल केवल लकड़ी बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो आने वाले समय में अन्य मुक्तिधामों के लिए भी मिसाल बन सकता है।
