*भीलवाड़ा फोकस न्यूज़ बनेड़ा -परमेश्वर दमामी*
नगर पालिका बनेड़ा द्वारा एसडीएम कार्यालय से घाटी के हनुमानजी रोड तक कराए जा रहे सीसी सड़क निर्माण कार्य ने शुरू होते ही विवादों का रूप ले लिया है। लाखों रुपये की लागत से बन रही इस सड़क पर बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर के खंभों को हटाए बिना ही सीमेंट-कंक्रीट की सड़क बना दी गई, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य आमजन को सुविधा देना होता है, लेकिन यहां स्थिति इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। सड़क निर्माण पूरा होने के बावजूद कई स्थानों पर बिजली के पोल सड़क के बीचों-बीच या उसके बेहद करीब खड़े नजर आ रहे हैं। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब सड़क निर्माण की योजना बनाई गई थी, तब संबंधित विभागों के बीच समन्वय क्यों नहीं किया गया?
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यदि पहले पोलों को हटाकर सड़क का निर्माण किया जाता तो न केवल सड़क चौड़ी और सुरक्षित बनती, बल्कि भविष्य में सरकारी धन की बर्बादी भी नहीं होती। अब यदि पोल हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है तो नई बनी सड़क को नुकसान पहुंचने की आशंका है। लोगों का कहना है कि यह योजना और क्रियान्वयन के बीच तालमेल की कमी को दर्शाता है।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी चिंता जताई कि सड़क पर खड़े पोल भविष्य में दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। खासकर रात के समय और तेज गति से गुजरने वाले वाहनों के लिए यह स्थिति जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों तथा एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
नागरिकों ने नगर पालिका, विद्युत विभाग और प्रशासन से संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सड़क बनने के बाद भी यदि आमजन को खतरे और असुविधा का सामना करना पड़े तो ऐसे विकास कार्यों का औचित्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सड़क पहले बनी या योजना? यदि पोल हटाने ही थे तो पहले क्यों नहीं हटाए गए, और यदि नहीं हटाने थे तो फिर सड़क का डिज़ाइन किस आधार पर तैयार किया गया? क्षेत्रवासियों की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में जवाब देते हैं या फिर यह सड़क भी सरकारी कार्यों की लापरवाही का एक और उदाहरण बनकर रह जाएगी।
