हरि शेवा उदासीन आश्रम में धार्मिक अनुष्ठान जारी

BHILWARA
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जालंधर वध, तुलसी प्रसंग, द्रौपदी चीरहरण एवं गजा सुर उद्धार की कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

भगवान शिव की शरण ही जीवन के कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग – डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज


भीलवाड़ा, 13 जून। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर सनातन सेवा समिति एवं हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर भीलवाड़ा में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन के सानिध्य में आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा महोत्सव के षष्ठम दिवस पर कथा व्यास प्रखर वक्ता परम पूज्य डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज ने भगवान शिव की असीम करुणा, धर्म स्थापना एवं भक्तों के उद्धार से जुड़े दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।

कथा श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए तथा संपूर्ण सभागार हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज ने शिव स्तुति के साथ कथा का शुभारंभ करते हुए जालंधर प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब अधर्म, अहंकार और अत्याचार अपनी सीमाएं लांघ जाते हैं, तब भगवान स्वयं धर्म की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। जालंधर के अत्याचारों से देवता, ऋषि और समस्त लोक व्यथित हो गए थे। अंततः भगवान शिव ने उसका संहार कर धर्म की पुनः स्थापना की और संसार को यह संदेश दिया कि अधर्म का अंत निश्चित है।
कथा के दौरान उन्होंने भगवान विष्णु द्वारा तुलसी के शीलहरण तथा तुलसी जी को प्राप्त दिव्य वरदान का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि तुलसी जी का जीवन त्याग, तपस्या, समर्पण और पतिव्रता धर्म का अनुपम आदर्श है। भगवान ने उन्हें ऐसा वरदान प्रदान किया कि सनातन धर्म में आज भी प्रत्येक पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान में तुलसी का विशेष महत्व बना हुआ है। महाराज श्री ने महाभारत के द्रौपदी चीरहरण प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि जब मनुष्य संसार के सभी सहारों से निराश हो जाता है और पूर्ण समर्पण भाव से भगवान को पुकारता है, तब प्रभु स्वयं उसकी रक्षा के लिए उपस्थित होते हैं। द्रौपदी की रक्षा कर भगवान श्रीकृष्ण ने यह सिद्ध किया कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाते। इसके पश्चात बाणासुर पर भगवान शिव की कृपा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव अपने भक्तों पर सदैव कृपालु रहते हैं। बाणासुर में अनेक दोष होने के बावजूद उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसकी रक्षा की तथा उसे धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान की। महिषासुर वध एवं गजासुर उद्धार के प्रसंग का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव केवल संहारकर्ता ही नहीं, बल्कि पतित-पावन, दयालु एवं करुणासागर भी हैं। गजासुर जैसे दैत्य को भी मोक्ष प्रदान कर उन्होंने यह सिद्ध किया कि उनकी शरण में आने वाला कोई भी जीव उनके अनुग्रह से वंचित नहीं रहता।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में सत्यनिष्ठ तप, सदाचार और ईश्वर भक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है। भगवान शिव की भक्ति मनुष्य को अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह से मुक्त कर आत्मकल्याण की ओर अग्रसर करती है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान शिव का स्मरण करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा उसे आध्यात्मिक शांति और आनंद की प्राप्ति होती है। कथा के दौरान -“करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा। श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्॥
विहितमविहितं वा सर्वमेतत् क्षमस्व। जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥”
श्लोक का भावार्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि करुणासागर भगवान महादेव मनुष्य के हाथ, पैर, वाणी, मन तथा इन्द्रियों से जाने-अनजाने में हुए समस्त अपराधों को क्षमा कर देते हैं।
प्रवचन के मध्य भक्ति रस से ओतप्रोत भजनों “भोले बाबा ने सबका उद्धार किया है, दीनों का हर पल बेड़ा पार किया है”, “जालंधर, गजासुर, बाणासुर तारे, शरण जो आया उसको भव से उबारे” तथा “आएगा जब बुलावा हरि का, छोड़ के सब कुछ जाना पड़ेगा” पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे और सम्पूर्ण सभागार शिवमय वातावरण में डूब गया। कथा के समापन पर महाआरती कर प्रसाद वितरण किया गया।
आज सवेरे आचार्य रोशन शास्त्री, उपाचार्य पंडित सत्यनारायण शर्मा, पंडित मनमोहन शर्मा, पंडित शिव नारायण शर्मा, जमनालाल शर्मा, अंकित शर्मा, मनोज शर्मा, सूर्य प्रकाश शर्मा, एवं पंडित सूरज शर्मा आदि ने विष्णु यज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियाँ दिलवाई।आज विष्णु यज्ञ में महेंद्र तीर्थानी अजमेर, चाँदमल सोमानी, कन्हैया मोरयानी , हरीश- निशा आडवाणी,
राजा -वर्षा टिक्यानी,
जयराम- वर्षा अभिचंदानी,  सपत्नी, पल्लवी वच्छानी, अशोक मूंदड़ा, धन्ना लाल माली आदि ने आहुतियां दी तथा महादेव का अभिषेक किया। आश्रम के संत मायाराम जी एवं संत गोविंदराम जी ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के दौरान प्रतिदिन प्रातःकाल विष्णु यज्ञ, महादेव का रुद्राभिषेक तथा सायंकाल काशी की तर्ज पर भव्य गंगा आरती, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं अखंड रामधुन का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ एवं पुण्य अर्जित करने का आह्वान किया।