सवाईपुर ( सांवर वैष्णव ):- सवाईपुर क्षेत्र के आमा गांव में शनिवार अल सुबह रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहां एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें बाइक सवार जीजा-साला की मौके पर मौत हो गई । सुचना पर बड़लियास थाना पुलिस मौके पर पहुंची, पुलिस ने शवों का कोटड़ी चिकित्सालय में पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों के सुपुर्द किया ।

थाना प्रभारी जसवंत सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 5:15 बजे सूचना मिली कि आमा गांव के कालिरडिया रोड़ पर दो युवक सड़क किनारे घायल अवस्था में पड़े हुए, इस पर पुलिस व एम्बुलेंस मौके पर पहुंची । दोनों को एम्बुलेंस की मदद से आमा चिकित्सालय लेकर गए, जहां दोनों को मृत घोषित किया । पोस्टमार्टम के लिए शवों को कोटड़ी चिकित्सालय लाया गया, जैसे ही दोनों की मौत की खबर पहुंचे तो दोनों ही गांवों में मातम छा गया और हर तरफ चिख पुकार मच गई ।

पुलिस ने बताया कि प्रार्थी राधेश्याम पिता प्रभु दास वैष्णव निवासी कन्या खेड़ी ने रिपोर्ट दी कि उनका भतीजा दीपक पिता संतोष वैष्णव उम्र 17 वर्ष निवासी कन्या खेड़ी और भतीजी का पति राहुल पिता कालूदास वैष्णव उम्र 24 वर्ष निवासी दलेल सिंह जी का खेड़ा, मंगरोप दोनों ही जीजा साला शुक्रवार को चित्तौड़गढ़ गये, जहां जीजा राहुल का टेंपो लेकर भीलवाड़ा आये, जहां टेंपो को खड़ा कर अल सुबह भीलवाड़ा से वापस खारों का खेड़ा, बड़लियास के लिए निकले थे, यहा खारों का खेड़ा में दिपक का ननिहाल है, इसी दौरान अल सुबह करीब तीन-चार बजे के बीच आमा तालाब के पास पीछे से आए एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने दोनों को बाइक सहित टक्कर मार दी, जिसमें दोनों जीजा-साला उछलकर दूर जाकर गिरे, इसके बाद भी अज्ञात वाहन ने दोनों को कुचलता हुआ मौके से फरार हो गया । शनिवार को कोटड़ी चिकित्सालय में शवों का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों के सुपुर्द किया । शव घर पहुंचने पर घरों में चीख-पुकार मच गई और गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया ।।
मौके पर पड़े रहे दोनों ही समय पर इलाज मिलता तो शायद बच सकती थी जान
आमा गांव के कालिरडिया रोड़ पर शनिवार अल सुबह हुए इस भीषण सड़क हादसे में बाद दोनों ही जीजा और साला घायल अवस्था में मौके पर तड़पते रहे, लेकिन सुनसान रास्ता और सुबह करीब तीन-चार बजे का समय होने के चलते, वहां से किसी का आवागमन नहीं हुआ और समय पर उपचार नहीं मिल पाया, सुबह करीब 5:15 बजे पुलिस को सूचना मिली तब तक देर हो चुकी थी, अगर समय पर इलाज मिलता तो शायद जान बच सकती थी ।।
एक हादसा और दोनों ही घरों का बुझ गया चिराग
इस एक भीषण सड़क हादसे में ना केवल जीजा साला की मौत हुई बल्कि दोनों ही घरों के चिराग बुझ गए और माता-पिता के बुढ़ापे में सहारे की लाठी टूट गई, क्योंकि मृतक दीपक और राहुल अपने पिता की इकलौती संतान थी, इस एक हादसे से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जीजा राहुल कैटरिंग का काम करता था, वही एक दो-ढाई साल की बच्ची हैं जिसके सिर से अब पिता का साया उठ गया, तो साला दीपक अपने ननिहाल खारों का खेड़ा में रहकर बड़लियास विद्यालय में कक्षा 11वीं की पढ़ाई कर रहा था, वह अविवाहित था ।।
