‘पंचायतीराज विभागे स्वाहा’ के मंत्रों संग दी आहुतियां, न्यायोचित मांगों पर सरकार से मांगा निर्णय
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
पंचायत समिति शाहपुरा गुरुवार को उस समय अनोखे विरोध प्रदर्शन का साक्षी बना, जब पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में पारंपरिक और प्रतीकात्मक अंदाज में सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। यज्ञ कुंड में आहुतियों के साथ गूंजते “पंचायतीराज विभागे स्वाहा” के मंत्रों ने कर्मचारियों के भीतर ेपउउमत कर रहे आक्रोश को मुखर रूप से सामने ला दिया। यह प्रदर्शन केवल विरोध नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन को चेताने वाला संदेश भी बन गया कि अब कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा अधिक दिनों तक नहीं ली जा सकती।
प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत आयोजित इस आंदोलन में पंचायत समिति शाहपुरा के साथ-साथ क्षेत्र की समस्त ग्राम पंचायतों के मंत्रालयिक कर्मचारियों ने भाग लेकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें वर्षों से लंबित हैं और बार-बार ज्ञापन, वार्ता एवं निवेदन के बावजूद समाधान नहीं निकलने से अब आंदोलन का रास्ता अपनाना मजबूरी बन गया है।
गुरुवार सुबह पंचायत समिति कार्यालय परिसर में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी सूर्यप्रकाश शर्मा की अगुवाई में सद्बुद्धि यज्ञ शुरू हुआ। मंत्रोच्चार और वैदिक रीति से संपन्न इस आयोजन में कर्मचारियों ने आहुतियां देकर सरकार से सद्बुद्धि आने की कामना की, ताकि कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिया जा सके।
कर्मचारियों ने बताया कि 1 जून से पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों का राज्यव्यापी आंदोलन लगातार जारी है। यह आंदोलन अब अपने छठे चरण में पहुंच चुका है और हर चरण के साथ आंदोलन का स्वर अधिक मुखर और व्यापक होता जा रहा है। शाहपुरा में आयोजित यह सद्बुद्धि यज्ञ आंदोलन की उसी श्रृंखला का हिस्सा रहा, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया।
आंदोलित कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में स्वतंत्र कार्य विभाजन, कैडर रिव्यू, नोशनल परिलाभ, अंतर जिला स्थानांतरण, हार्ड ड्यूटी एलाउंस और अतिरिक्त पंचायत भत्ता शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा कार्य व्यवस्था में मंत्रालयिक कर्मचारियों पर कार्यभार लगातार बढ़ता जा रहा है, जबकि सुविधाएं और पदोन्नति संबंधी व्यवस्थाएं वर्षों से ठहरी हुई हैं।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले मंत्रालयिक स्टाफ की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही। पंचायत स्तर पर योजनाओं के संचालन, रिकॉर्ड प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय और जनहित कार्यों का बड़ा दायित्व इन्हीं कर्मचारियों पर होता है, लेकिन सुविधाओं और सेवा शर्तों के मामले में लगातार उपेक्षा झेलनी पड़ रही है।
सद्बुद्धि यज्ञ में शामिल कर्मचारियों ने दो टूक कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि सरकार को अब कर्मचारियों की आवाज सुननी ही होगी। शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ यह आंदोलन आवश्यकता पड़ने पर व्यापक जनआंदोलन का रूप भी ले सकता है।
इस दौरान काली मीणा, मांगी धाकड़, सीमा सेन, मीना माली, रेखा खंडेलवाल, खुशबू राठी, महावीर सेन, मुकेश धाकड़, सुखदेव बैरवा और शांति लाल कोली सहित अनेक कर्मचारियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पंचायत समिति शाहपुरा के सभी ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समिति कार्यालय के कार्मिक इस सामूहिक सद्बुद्धि यज्ञ में शामिल रहे। यह सहभागिता कर्मचारियों की एकता और साझा संघर्ष का स्पष्ट संकेत है।
यज्ञ स्थल पर मौजूद कर्मचारियों के चेहरों पर संयम जरूर था, लेकिन भीतर का असंतोष साफ झलक रहा था। हर आहुति के साथ कर्मचारियों की यही पुकार थी कि सरकार उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान निकाले और मंत्रालयिक कर्मचारियों के साथ न्याय करे।
शाहपुरा में हुआ यह सद्बुद्धि यज्ञ अब एक प्रतीक बन गया हैकृऐसा प्रतीक, जो बता रहा है कि जब मांगों पर संवाद बंद हो जाए, तब विरोध नए रूप तलाश लेता है। पंचायतीराज कर्मचारियों का यह अनूठा आंदोलन प्रशासन और सरकार दोनों के लिए स्पष्ट संदेश है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय की अपेक्षा है। पंचायत समिति शाहपुरा से उठी यह आवाज आने वाले दिनों में प्रदेशभर के आंदोलन को नई धार दे सकती है।
