आपातकाल के संघर्ष और विभाजन की यादें की साझा
19 माह जेल में रहकर भी नहीं डिगा लोकतंत्र का संकल्प
अग्रवाल बोले- आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय
भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी
भीलवाड़ा में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं लोकतंत्र सेनानी, वरिष्ठ पत्रकार दयाराम मेठानी से शनिवार को सांसद दामोदर अग्रवाल ने उनके निवास पर शिष्टाचार भेंट कर न केवल कुशलक्षेम जानी, बल्कि लोकतंत्र, संगठन और राष्ट्र निर्माण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर गहन संवाद भी किया। यह मुलाकात राजनीतिक औपचारिकता से कहीं आगे बढ़कर अनुभव, संघर्ष और विचारों के आदान-प्रदान का एक प्रेरणादायी अवसर बन गई।
सांसद प्रवक्ता विनोद झुरानी ने बताया कि मुलाकात के दौरान सांसद दामोदर अग्रवाल ने दयाराम मेठानी के लंबे राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के अनुभवों को गंभीरता से सुना और संगठन के प्रति उनके अतुलनीय योगदान की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता केवल पार्टी के स्तंभ ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक दीपस्तंभ हैं। ऐसे अनुभवी कार्यकर्ताओं का संघर्ष, समर्पण और संगठन निष्ठा युवा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
बैठक के दौरान माहौल उस समय भावुक हो उठा जब दयाराम मेठानी ने भारत-पाक विभाजन के दौर की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने उस कठिन समय के सामाजिक, मानवीय और राष्ट्रीय संघर्षों को याद करते हुए बताया कि विभाजन केवल भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों की पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष की कहानी भी था। उनके अनुभवों ने उपस्थित सभी लोगों को इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय से रूबरू कराया।
इसके साथ ही चर्चा का केंद्र देश में लगा आपातकाल भी रहा। दयाराम मेठानी ने बताया कि लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष में उन्हें करीब 19 माह तक जेल में रहना पड़ा, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनके संकल्प में कभी कमी नहीं आई। उन्होंने कहा कि जेल की सलाखें विचारों को कैद नहीं कर सकतीं। लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रहित के लिए संघर्ष करना उनका कर्तव्य था, जिसे उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाया।
सांसद दामोदर अग्रवाल ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए कहा कि उस दौर में लोकतंत्र सेनानियों ने जिस साहस और त्याग का परिचय दिया, वही आज देश की मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल संविधान से नहीं, बल्कि उन लोगों के बलिदान से होती है जो संकट के समय सत्य और स्वतंत्रता के पक्ष में खड़े रहते हैं।
अग्रवाल ने दयाराम मेठानी के सामाजिक और राजनीतिक योगदान को अनुकरणीय बताते हुए उनका सम्मान किया तथा कहा कि वरिष्ठ नेताओं का अनुभव संगठन की अमूल्य धरोहर है, जिसे सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
इस अवसर पर पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर मेठानी, सांसद प्रवक्ता विनोद झुरानी, कल्पेश चैधरी सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। मुलाकात ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
