*पूर्ण सद्गुरु की शरण से ही निरंकार प्रभु-परमात्मा की प्राप्ति सम्भव-सन्त जसविंदर जी*

BHILWARA
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मांडलगढ़ के त्रिवेणी में बही भक्ति की सरिता,निरंकारी सन्त-समागम में आसपास के गांवों से श्रद्धालुओं ने सत्संग में लिया बढ़चढ़कर भाग

मांडलगढ़। मानव जीवन मे ही परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है व जीवन को श्रेष्ठ व आनन्दमयी बनाया जा सकता है क्योंकि मानव जीवन को सबसे श्रेष्ठ बताया गया है । जिने में तो जीवन तो पशु भी विचरण कर रहा है अपना पेट भर रहा है लेकिन सोचने-समझने व विचार करने के साथ ईश्वर को प्राप्त करने की सोच केवल ओर केवल मानव योनि में ही सम्भव है। ये विचार श्री जसमिन्दर सिंह जी मुखी एवं ज्ञान प्रचारक निरंकारी मंडल कोटा जोन की उपस्थिति में त्रिवेणी संगम पर  आयोजित सन्त समागम में श्रद्धालुओं के समक्ष व्यक्त किए।

सिंह ने अपने विचारों में बताया कि मानव मात्र को उसके कर्मो के हिसाब से फल मिलता है। परमात्मा की  समझ नही होने पर आत्मा चौरासी के चक्कर मे रहती हैं। फिर से ये मानव तन  धारण नही करना पड़े व चौरासी के बंधन से मुक्ति प्राप्त करनी  है तो केवल सद्गुरु के सहारे यह सम्भव है। अच्छे कर्मों का अच्छा फल व बुरे कर्मो का बुरा फल इंसान को इसी जन्म में भोगना पड़ता है । बुरे कर्मो का फल भोगने के लिए पशु,पेड़ व विभिन्न योनियों को धारण करना पड़ता है। सद्गुरु अच्छे व बुरे कर्मो को तारता है। बुरे कर्म करने वाला लोहे की चेन से बंधा हुआ होता है व अच्छे कर्म करने वाला सोने की चेन से बंधा हुआ होता है लेकिन दोनों प्रकार के लोगो को सद्गुरु ही भव से पार करवा सकता है। किसी भी प्रकार से श्रद्धा से ईश्वर को स्मरण किया जाता है तो वह उस इंसान की समस्याओ को सुनता है व ईश्वर उसकी मदद भी करता है। निरंकार प्रभु परमात्मा को जानकर इससे पाया जा सकता है व मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। सच्चे व पूर्ण गुरु की शरण मे जाने से सभी अंधविश्वास से दूरी हो जाती है। सांसारिक सुख तो कभी भी पाए जा सकते है लेकिन निरंकार प्रभु परमात्मा को इन सुखों से पाया नही जा सकता है।  निरंकार प्रभु परमात्मा निर्लेप,बेरंगा,अडिग अजर-अमर है। यह निडर है कोई भी शस्त्र इसे काट नही सकता,पानी इसे भिगो नही सकता,अग्नि इसे जला नही सकती है ओर केवल मात्र  गुरु की किरपा से ही इसे पाया जा सकता है।ईश्वर हर जगह समाया हुआ है ये कण कण में व्याप्त है। सन्त समागम में क्षत्रिय संचालक सन्त हरिचरण,गणेश महात्मा,ओमप्रकाश मेहरा,,उदय लाल,महात्मा भैरू लाल, मुखी दुर्गालाल,महात्मा पप्पू खटीक, सुखदेव बलाई,मुकेश बैरवा, दुर्गालाल बैरवा,मोहनपुरा सहित अन्य श्रदालु मौजूद रहे। स्थानीय सन्तो द्वारा हिंडौली से आए सन्त सिंह को मांडलगढ़ दुर्ग की तस्वीर,शॉल व दुप्पटा,मालाएं पहनकर स्वागत-सम्मान किया गया। सन्त समागम में श्रद्धालुओं ने गीत,भजन,विचार प्रस्तुत कर सद्गुरु  द्वारा बताए जा रहे सदमार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।