भीलवाड़ा में आस्था का महासंगम: आचार्य रामदयालजी महाराज की पधरावणी में उमड़ा जनसैलाब

BHILWARA
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भीलवाड़ा, मूलचन्द पेसवानी

धर्मनगरी भीलवाड़ा रविवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर नजर आई, जब अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्री रामदयालजी महाराज विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के लिए भव्य पधरावणी के साथ शहर पहुंचे। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी, 108 थालियों से महाआरती, भव्य शोभायात्रा, पुष्पवर्षा और जयघोषों के बीच पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।


स्टेशन चौराहे पर सर्व समाज की ओर से वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के साथ आचार्यश्री का स्वागत किया गया। 108 थालियों से हुई महाआरती के बाद स्टेशन चौराहे से माणिक्यनगर स्थित रामद्वारा तक विशाल शोभायात्रा निकाली गई। हाथी, घोड़े, ऊंट, शाही लवाजमा, छत्र-चंवर, रामभक्ति से ओतप्रोत बैंड, महाकाल आरती दल और जबलपुर से आए बैंड की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही।
शोभायात्रा मार्ग पर 108 स्वागत द्वार बनाए गए थे। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर आचार्यश्री का अभिनंदन किया, जबकि ड्रोन से भी पुष्पवर्षा की गई। कलाकारों ने मार्ग में सतरंगी रंगोलियां सजाकर आयोजन की भव्यता को और बढ़ाया। शोभायात्रा की विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसका अग्रभाग सूचना केंद्र चौराहे तक पहुंच चुका था, जबकि अंतिम छोर स्टेशन चौराहे पर ही था।
रामद्वारा पहुंचकर आचार्य रामदयालजी महाराज ने अभिजीत मुहूर्त में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश किया और धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि चातुर्मास आत्मचिंतन, मर्यादा, सेवा और भक्ति का काल है। उन्होंने विश्व शांति, सद्भाव और मानवता की रक्षा का संदेश देते हुए कहा कि भारत आतंकवाद, भ्रष्टाचार और सामाजिक विकृतियों से मुक्त होकर विश्व को शांति का मार्ग दिखाए।
उन्होंने कहा कि “जो व्यवहार हमें स्वयं पसंद नहीं, वह दूसरों के साथ भी नहीं करना चाहिए। संस्कृति समाज और राष्ट्र को जोड़ती है, जबकि विकृतियां उसे कमजोर करती हैं।”
आचार्यश्री ने भीलवाड़ा में जैन संतों के चातुर्मास का उल्लेख करते हुए इसे सनातन और जैन संस्कृति का अद्भुत संगम बताया। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा की धरती संतों की तपोभूमि बन गई है और यहां का वातावरण धर्ममय हो उठा है।
समारोह में देशभर से आए अनेक संतों ने भी मंगलभाव व्यक्त किए। स्वरूपा महिला मंडल ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया तथा 11 विद्वानों ने स्वस्तिवाचन किया। इस अवसर पर विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के प्रतीक चिन्ह का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में सांसद दामोदर अग्रवाल, विधायक अशोक कोठारी, पूर्व विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी सहित कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों रामस्नेही श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने चातुर्मास के आयोजक अशोक अजमेरा परिवार, मुरली ईनाणी परिवार और शिव गगरानी परिवार की भक्ति भावना की सराहना करते हुए कहा कि इन परिवारों ने भीलवाड़ा को धर्मलाभ का दुर्लभ अवसर प्रदान किया है।
चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन रामधुनी, वाणीजी पाठ, प्रवचन, संध्या आरती सहित अनेक धार्मिक आयोजन होंगे। 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा महोत्सव, 13 से 20 सितंबर तक भागवत ज्ञान महोत्सव तथा 22 अक्टूबर को चातुर्मास का समापन होगा।