*21-7-26 कांगनी मे बरसात नही हाेने से सुखने लगी फसले किसान हाे रहे चितिंत*

BHILWARA
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*राकेश शर्मा कांगनी*- ग्राम पंचायत कांगनी मे कई दिनाे से बरसात नही हाेने से अब उडद मुंग तिल्ली मक्का की फसले अब मुरझाने शुरू हाेने लगी है | जिससे किसान चितिंत दिखाई देने लगे है |  इस वर्ष मे केवल 5 जुलाई काे रिमझिम बरसात हुई थी | उसके बाद वापस बरसात नही हुई और तेज धुप के साथ उमश हाेने से फसले मुरझाने के साथ पाैधे नष्ट हाे रहे है कई किसानाे ने ताे खेताे मे दाे बार बुवाई कर चुके है फिर बरसात नसीब नही हाे पा रही है जिसकाे लेकर किसान बडे गहरे साेच मे पडे हुए है । किसान बताते है कि कांगनी मे इस बार माैसम पुर्व ही 3 जुलाई काे प्रथम केवल रिमझिम बरसात शुरू हुई थी । रूक रूक कर कभी धुप ताे कभी रिमझिम जाे लगातार 5 जुलाई तक चलती रही लेकिन माैसम की तेज बरसात व फसल बुवाई करने लायक इस वर्ष मे एक भी बार नही हुई है |  किसानाे ने केवल रिमझिम बरसात हाेने के बाद कुछ लाेगाे ने खेताे मे बुवाई कर दी थी वही दुसरे किसान जिन्हाैने अच्छी बरसात का इंतजार किया वाे आज दिन तक भी खेताे मे बुवाई नही कर सके वाे अब अच्छी बरसात हाेने के इंतजार मे खेत बिना फसल ही पडे हुए है | वह अभी भी बरसात का इंतजार कर रहे है लेकिन बरसात नही हाे रही है | काश्तकाराे ने भी 5 जुलाई काे रिमझिम बरसात हाेने के बाद काश्तकाराे ने खेताे मे बुवाई कर डाली थी लेकिन बरसात नही हाेने से कई फसले ताे अब नष्ट हाे गई ताे कई फसले नष्ट हाेने की कगार पर आ गई है । जिससे किसान चितित हाे रहे है | लेकिन अभी ऐसे कई खेताे मे जिनके कुंए है वाे पिलाई करना शुरू हाे गये  है और वही दुसरी तरफ जाे किसान केवल बरसात के चलते उन खेताे मे बुवाई करके फसलाे की पैदावर करते है उन खेताे मे आज कल चल रही तेज गर्मी के चलते फसले सुखने की कगार पर आ गई है | कही खेताे मे वही दुसरी तरफ सुअराे ने पुरे खेताे की फसलाे काे चाैपट कर गये है बरसात नही आने से फसले मुरझाने के कारण खेत हरे भरे दिखाई देने बंद हाे गया है खेताे मे खडी फसले अब मुरझाने लगी है |जिसके चलते किसान चितित दिखाई दे रहे है । किसान बताते है कि हमारे ताे बेराेजगार काे बढावा आगे से आगे पीले चावल देता ही जा रहा है इस बार माैसम की बरसात हुई नही ताे इस बार भी फसल भी चाैपट हाेने काे है | जिसके चलते हमारी आर्थिक स्थिति बिगड गई है  खेताे मे बुवाई करवाई जिसके खाद , बीज , हकाई , बुवाई का प्रत्येक 1 बीघा का खर्चा 4000 रूपये के हिसाब से हुआ है । वही खेताे पर आवारा पशु व नील गाय काे बचाने के लिये खेत पर एक झाली लगाने के लिये 7000 रूपये प्रत्येक झाली का खर्चा हाे गया है । अभी फसलाे काे बरसात की जरूरत है लेकिन बरसात नही हाे रही है ।बरसात समय पर नही आने से फसलाे मे पैदावार कम हाेगी क्युकि फसलाे काे खेताे मे बाेये जाने का समय काफी हाे गया है जिसके चलते फसलाे मे पैदावार की कमी आयेगी ताे उन्हे बेच नही सकेगे अगर बेच नही सकेगे ताे पैसा कहा से आयेगा अभी स्थिति यह बनी हुई है खेताे मे काफी पैसा लगा चुके है लेकिन वापस फसले नष्ट हाेने की कगार पर है । फसले खेताे मे नाम माञ की खडी है अगर समय के चलते बरसात नही हाेगी ताे आर्थिक व्यवस्था बिगड जायेगी । इस बार अच्छी बरसात अब तक भी नही आने से कांगनी के दाेनाे तालाब सुखे पडे है | तालाब खाली रह जाने से ताे गांव मे  1200 बीघा जमीन पर फसल नही हाे पायेगी दाेनाे तालाबाे से गांव मे 700 बीघा जमीन की पीवल की खेती मानसागर तालाब से की जाती है और 500 बीघा जमीन की पीवल कुशाल सागर तालाब से खेती की जाती है अब बरसात नही हुई ताे इस बार 1200 बीघा जमीन पर पीवल से फसले नही हाे पायेगी । जिसके चलते किसान चितित दिखाई दे रहे है ।
*21-7-26 कांगनी.कांगनी के एक खेत पर सुख रही मक्का की फसल |*