पूरे जिले में उबाल… पटवार संघ ने छेड़ा आंदोलन, हड़ताल की चेतावनी
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा तहसील के गिरड़िया पटवार हल्के के नरसिंहपुरा गांव में 2 अगस्त 2023 को हुए बहुचर्चित कोटड़ी कोयला भट्टी कांड ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उस समय पूरे क्षेत्र को झकझोर देने वाले इस सनसनीखेज हत्याकांड में एक नाबालिग युवती के साथ दुष्कर्म के बाद उसे जिंदा कोयला भट्टी में डालकर हत्या कर देने की वीभत्स घटना सामने आई थी। इस घटना के विरोध में कई दिनों तक उग्र आंदोलन चला, ग्रामीणों ने न्याय की मांग को लेकर धरने-प्रदर्शन किए और प्रशासन पर लगातार सवाल उठे थे।

अब, घटना के करीब तीन वर्ष बाद जिला प्रशासन ने उस समय के गिरड़िया हल्के के पटवारी हरदेव बैरवा को राजकीय सेवा से बर्खास्त (डिसमिस फ्रॉम सर्विस) कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ ही मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। प्रशासन के इस फैसले ने राजस्व कर्मचारियों में जबरदस्त नाराजगी पैदा कर दी है। राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। वहीं कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान ने भी पटवारी के समर्थन में मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है।

तीन साल बाद बड़ी कार्रवाई, कर्मचारियों में उबाल–
जिला प्रशासन द्वारा 22 जुलाई 2026 को जारी आदेश में पटवारी हरदेव बैरवा को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। आदेश की जानकारी सामने आते ही पूरे भीलवाड़ा जिले के पटवारी और कानूनगो संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। संघ के पदाधिकारियों ने इसे अन्यायपूर्ण और एकतरफा निर्णय बताते हुए इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ की जिला शाखा की आपात बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सोमवार, 27 जुलाई को जिलेभर के सभी उपखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर उपखंड अधिकारियों के माध्यम से जिला कलक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि इसके बाद भी प्रशासन ने अपने निर्णय का पुनरावलोकन नहीं किया तो बुधवार से पूरे भीलवाड़ा जिले में पटवारी और कानूनगो पूर्ण कार्य बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ जाएंगे।
संघ ने साफ चेतावनी दी है कि हड़ताल के कारण आमजन को होने वाली परेशानी और राजस्व कार्यों में आने वाली बाधा की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

अधिकारी-कर्मचारी विकास संस्थान भी आया समर्थन में-
रविवार को भीलवाड़ा स्थित अंबेडकर भवन, पुर में कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान की बैठक भी आयोजित हुई। बैठक में पटवारी हरदेव बैरवा के मामले पर विस्तार से चर्चा की गई। संस्थान ने भी सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि सोमवार, 27 जुलाई को शाम 4 बजे जिला कलक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। संस्थान के पदाधिकारियों ने उन सदस्यों से भी अपील की है जो बैठक में उपस्थित नहीं हो सके, वे आंदोलन को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचें।
बर्खास्त पटवारी का वीडियो वायरल, बोले- मुझे बलि का बकरा बनाया गया–
इधर सेवा से बर्खास्त किए गए पटवारी हरदेव बैरवा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उनका कहना है कि 2 अगस्त 2023 को हुई घटना के तुरंत बाद सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। घटना के बाद संबंधित अतिक्रमण भी हटा दिया गया था तथा उन्हें 14 अगस्त तक धारा 91 के तहत अतिक्रमण की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी।
पटवारी बैरवा का दावा है कि मामले की जांच के दौरान तहसील प्रशासन और उपखंड प्रशासन ने उन्हें निर्दोष मानते हुए रिपोर्ट दी थी, इसके बावजूद जिला प्रशासन ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बिना उचित आधार के कार्रवाई का शिकार बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि 23 जुलाई को बर्खास्तगी की जानकारी मिलने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्होंने भावुक होकर कहा कि घटना के बाद 13 दिसंबर 2025 को उन्हें हार्ट अटैक भी आया था और उदयपुर में स्टेंट डलवाना पड़ा था। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 1 जून 2026 को ही उनकी कोटड़ी हल्के के बोरड़ा में नई पोस्टिंग हुई थी, लेकिन दो माह भी पूरे नहीं हुए कि उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उनका यह वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
बहुचर्चित था कोटड़ी भट्टी कांड–
उल्लेखनीय है कि 2 अगस्त 2023 को नरसिंहपुरा गांव में हुई यह घटना पूरे राजस्थान को झकझोर देने वाली थी। एक नाबालिग युवती के साथ दुष्कर्म कर उसकी निर्मम हत्या कर शव को कोयला बनाने वाली भट्टी में डाल देने की वारदात ने लोगों को स्तब्ध कर दिया था। घटना के बाद ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कई दिनों तक आंदोलन किया। दोषियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरने, प्रदर्शन और सड़क जाम हुए थे। यह मामला लंबे समय तक प्रदेश की सुर्खियों में बना रहा।
अब तीन वर्ष बाद पटवारी पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई ने इस पुराने जख्म को फिर से ताजा कर दिया है। एक ओर प्रशासन अपने निर्णय को उचित ठहरा रहा है, वहीं कर्मचारी संगठन इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए संघर्ष की राह पर उतर आए हैं।
अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर–
सोमवार को प्रस्तावित ज्ञापन और उसके बाद होने वाले घटनाक्रम पर पूरे जिले की नजर टिकी हुई है। यदि जिला प्रशासन अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करता है तो बुधवार से प्रस्तावित पटवारियों और कानूनगो की हड़ताल राजस्व व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। जमीन संबंधी कार्य, नामांतरण, सीमांकन, फसल गिरदावरी सहित अनेक प्रशासनिक सेवाएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल कोटड़ी भट्टी कांड से जुड़ा यह नया घटनाक्रम एक बार फिर जिले में चर्चा का केंद्र बन गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन अपने फैसले पर कायम रहता है या कर्मचारी संगठनों के बढ़ते दबाव के बीच पुनर्विचार का रास्ता अपनाता है।
