विश्व शांति के लिए युवाओं में रामभक्ति और राष्ट्रभक्ति का जागरण जरूरी- आचार्य रामदयालजी महाराज

BHILWARA
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भीलवाड़ा, मूलचन्द पेसवानी।
अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर एवं जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि संत का जीवन स्वयं के सुख-दुख के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए समर्पित होता है। संत की अपनी पीड़ा का कोई महत्व नहीं होता, उसका एकमात्र लक्ष्य समाज और राष्ट्र की पीड़ा को दूर करना होता है। वर्तमान समय में युवाओं की दिशा और दशा पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। यदि राष्ट्र और समाज को सुखी, समृद्ध और संस्कारित बनाना है तो युवा पीढ़ी में रामभक्ति और राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।



वे रविवार को भीलवाड़ा रामद्वारा में ष्विश्व शांति एवं कल्याणष् चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रवर्तक स्वामी रामचरणजी महाराज ने भी यही संदेश दिया था कि ष्सुमिरन राम नाम का करें और सेवा राष्ट्र की करें।ष् राष्ट्र सेवा सर्वोच्च साधना है और इससे बढ़कर कोई धर्म नहीं हो सकता।

रामभक्ति और राष्ट्रभक्ति से ही सशक्त होगा समाज

आचार्यश्री ने कहा कि भीलवाड़ा की धरती सनातन संस्कृति और रामभक्ति की मजबूत परंपरा से जुड़ी रही है। यहां के लोगों में भगवान श्रीराम और राष्ट्र के प्रति गहरी आस्था एवं समर्पण का भाव है। यही संस्कार समाज को मजबूत बनाते हैं और राष्ट्र को नई दिशा देते हैं।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा वर्ग आधुनिकता के साथ अपने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी अपनाए। रामभक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदर्श जीवन, अनुशासन, सेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देती है।

पॉलीथिन का उपयोग छोड़ें, गौवंश की रक्षा करें

आचार्य रामदयालजी महाराज ने पर्यावरण संरक्षण और गौसेवा का संदेश देते हुए श्रद्धालुओं से पॉलीथिन का उपयोग बंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सड़कों पर फेंकी जाने वाली पॉलीथिन की थैलियां गौवंश के लिए काल साबित हो रही हैं। भोजन के साथ पॉलीथिन निगलने से असंख्य गौवंश असमय मौत का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में गौमाता की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक और धार्मिक दायित्व है।

सद्गुरु की कृपा से ही जीवन का कल्याण संभव

उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को जीवन में सद्गुरु का सान्निध्य प्राप्त हो जाता है, वह वास्तव में भाग्यशाली होता है। सद्गुरु का दर्शन, वंदन और सान्निध्य जीवन को सही दिशा देता है। भगवान राम और सद्गुरु की कृपा के बिना जीवन में सच्ची शांति और आत्मिक सुख प्राप्त नहीं हो सकता। जीवन की हर समस्या का समाधान सद्गुरु की कृपा से संभव है, बशर्ते हमारे भीतर उनके प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास हो।

सत्संग में तन ही नहीं, मन भी होना चाहिए

आचार्यश्री ने कहा कि सत्संग का लाभ तभी मिलता है जब व्यक्ति का तन और मन दोनों एकाग्र होकर वहां उपस्थित हों। यदि शरीर सत्संग में बैठा हो और मन संसार की उलझनों में भटक रहा हो तो वह अपनी आत्मा के साथ अन्याय कर रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि जब भी रामद्वारा आएं तो तन के साथ मन को भी भगवान के चरणों में समर्पित करें।

भजन के बिना नहीं मिलती पापों से मुक्ति

भजन की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि नियमित भजन और सत्संग से ही मनुष्य अज्ञान, मोह, वासना और पापों से मुक्त हो सकता है। संसार के बंधनों से मुक्ति का मार्ग भजन और सद्गुरु की कृपा से ही प्रशस्त होता है। जो लोग प्रतिदिन भजन और सत्संग में भाग लेते हैं, वे वास्तव में साधुवाद के पात्र हैं।

उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा रामद्वारा किसी बैकुंठ से कम नहीं है। यहां प्रतिदिन करोड़ों बार राम नाम का स्मरण होता है और यही वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनाता है। यह चातुर्मास पूरे विश्व में शांति, सद्भाव और कल्याण की भावना से आयोजित किया जा रहा है।

भजन करने जरूर आएं

आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि यदि किसी कारणवश प्रतिदिन प्रवचन में शामिल नहीं हो पाएं तो भी भजन के लिए अवश्य आएं। उन्होंने कहा कि सत्संग और भजन में श्रद्धा से आने वाले लोग मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं प्रसन्न रहते हैं। जो लोग अभी तक नहीं आए हैं, वे केवल देखने के लिए भी आएंगे तो उन्हें भी आध्यात्मिक आनंद और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होगा।

मानस प्रवचन और भजन की प्रस्तुतियां

आचार्य रामदयालजी महाराज से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने श्रीरामचरितमानस पर आधारित प्रवचन दिया। वहीं कोटा से पधारे संत प्रीतमरामजी ने भजनों की मनमोहक प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। प्रवचन के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री की आरती उतारी।

सत्संग में भीलवाड़ा सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। दोपहर 3 से 5 बजे तक राम नाम साधना मंडल की ओर से ष्श्वासों-श्वास राम नामष् भजन का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई।

चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 8रू30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ, सुबह 9 से 10 बजे तक दैनिक सत्संग तथा सूर्यास्त के समय संध्या आरती का आयोजन नियमित रूप से किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।