*मातृ ऋण, महात्मा ऋण एवं परमात्मा ऋण से कभी मुक्त नहीं हो सकते-आचार्य रामदयालजी महाराज*

BHILWARA
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*दुनिया में सब ऋण चुकाए जा सकते पर मातृ ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता*

भीलवाड़ा । दुनिया में सब ऋण चुकाए जा सकते पर मातृऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता। जिस तरह हवा पानी के बिना कोई पेड़ बड़ा नहीं हो सकता उसी तरह जननी का दूध पिये बिना बालक का शरीर पुष्ट नहीं हो सकता। मां के दूध से ही बालक को शक्तियां प्राप्त होती है। इंसान मातृ ऋण, महात्मा ऋण एवं परमात्मा ऋण से कभी मुक्त नहीं हो सकता। मातृ ऋण से प्रकृति जन्य शरीर मिलता है तो महात्मा ऋण से आत्म तत्व का ज्ञान प्राप्त होता है। उस परमात्मा का ऋण तो क्या चुकाएंगे जो जन्म मरण से मुक्ति प्रदान करने वाली अद्भुत अलौकिक शक्ति है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी रामदयालजी महाराज ने बुधवार को ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि माता पिता हमेशा संतान का हित एवं भला चाहते है पर कई बार संतान संपदा व समृद्धि पाने के बाद उन्हें लज्जित व व्यथित कर देती है। इससे बड़ी विकृति संसार में नहीं हो सकती है। इंसान कई बार कृपा प्राप्त करने के बाद भी गुरू व परमात्मा का अर्न्तविरोधी होकर दूषित मानसिकता का शिकार हो जाता है। आचार्यश्री ने कहा कि गुरू के समक्ष स्वयं को ज्ञानी के रूप में पेश करने से बड़ी कृतध्नता नहीं हो सकती ओर ऐसी कृतध्नता से खतरनाक कोई पॉयजन (विष) संसार में नहीं है। ऐसे हालात घोर अज्ञानवाद के कारण निर्मित होते है ओर हर युग में ऐसे कृतध्न व्यक्ति होते आए है। उन्होंने कहा कि जो माता पिता अपने बच्चों को संसार देते है, सम्पन्नता, समृद्धता व योग्यता देते है वहीं उनके खून के प्यासे हो जाते है। जिन गुरू की कृपा से प्रगति होती है उनको नष्ट करने का प्रयास करने वाले को संसार कृतध्न कहता है। ऐसे व्यक्ति को नरक में भी जगह नहीं मिलती भले वह थोड़ी देर के लिए अपने अहंकार की तुष्टि कर ले। आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि जीवन में हमे जो ज्ञान प्राप्त होता है वह गुरू की कृपा से ही मिलता है ऐसे में उनके प्रति कृतज्ञता के भाव हमेशा रहने चाहिए। कोई शिष्य ये जताने की कोशिश करे कि वह तो ये सब ज्ञान पहले ही जानता था तो उसका महापतन होता है। आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।