जहां शिक्षक लेते हैं संकल्प, वहीं से बदलती है शिक्षा की तस्वीर और वहीं से शुरू होता है राष्ट्र निर्माण का भविष्य

BHILWARA
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विद्यालय ही गढ़ेंगे विकसित भारत की नींव, शाहपुरा की वाकपीठ संगोष्ठी में गूंजा शिक्षा का संकल्प
द्विदिवसीय सत्रारंभ संगोष्ठी में जुटे प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के संस्था प्रधान, विधायक डॉ. लालराम बैरवा बोले- नवाचार, गुणवत्ता और संस्कार से बनेगा शिक्षा का नया भविष्य
शाहपुरा-मूलचन्द पेसवानी
नए शैक्षणिक सत्र के आगाज के साथ शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा, नई ऊर्जा और नए संकल्प देने का संदेश शाहपुरा से पूरे भीलवाड़ा जिले में गूंजा। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नया खेड़ा (ग्राम पंचायत बोरड़ा बावरियान) के तत्वावधान में आयोजित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय संस्था प्रधानों की द्विदिवसीय सत्रारंभ वाकपीठ संगोष्ठी (सत्र 2026-27) केवल एक औपचारिक बैठक नहीं रही, बल्कि यह शिक्षा के भविष्य को लेकर मंथन, नवाचार और गुणवत्ता सुधार का सशक्त मंच बन गई। शाहपुरा स्थित सेन समाज धर्मशाला में आयोजित इस संगोष्ठी में शिक्षा जगत से जुड़े अधिकारियों, संस्था प्रधानों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों ने एक स्वर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नैतिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक डॉ. लालराम बैरवा ने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि एक अच्छा शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक नहीं पढ़ाता, बल्कि राष्ट्र का भविष्य गढ़ता है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा बच्चे के जीवन की वह मजबूत नींव है, जिस पर उसका संपूर्ण व्यक्तित्व और भविष्य खड़ा होता है। यदि शुरुआती शिक्षा मजबूत होगी तो देश का भविष्य भी सशक्त होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राजकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने संस्था प्रधानों से अपेक्षा की कि वे नए शैक्षणिक सत्र में केवल औपचारिकताओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचारों, तकनीक आधारित शिक्षण और विद्यार्थियों की व्यक्तिगत प्रगति पर विशेष ध्यान दें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) रामेश्वर प्रसाद जिनगर ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने संस्था प्रधानों से विद्यालयों में अनुशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नियमित मूल्यांकन और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संस्था प्रधान विद्यालय की धुरी होते हैं और उनके नेतृत्व से ही विद्यालय की पहचान बनती है।
विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) जगजीतेंद्र ने नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, शैक्षणिक नवाचारों और प्रशासनिक दक्षता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि बच्चों की प्रतिभा को पहचानने और उसे दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी है। उन्होंने संस्था प्रधानों से विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन, नियमित उपस्थिति और सीखने के परिणामों में सुधार के लिए विशेष प्रयास करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में वाकपीठ के संरक्षक एवं मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सत्यनारायण कुमावत ने संस्था प्रधानों से विद्यालयों में टीम भावना के साथ कार्य करने, शिक्षकों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की योजनाओं का प्रभाव तभी दिखाई देगा जब प्रत्येक विद्यालय लक्ष्य आधारित कार्य संस्कृति अपनाएगा।
वाकपीठ अध्यक्ष सच्चिदानंद टेलर ने संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रत्येक नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत शिक्षकों और संस्था प्रधानों के लिए नए संकल्प का अवसर होती है। ऐसे आयोजन अनुभवों के आदान-प्रदान, नई योजनाओं की जानकारी और बेहतर कार्यप्रणाली विकसित करने के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं।
द्विदिवसीय संगोष्ठी के दौरान संस्था प्रधानों के बीच अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार, आधारभूत सुविधाओं का विकास, नामांकन वृद्धि, ड्रॉपआउट रोकने की रणनीति, बच्चों में भाषा एवं गणितीय दक्षता बढ़ाने, डिजिटल शिक्षा, सतत मूल्यांकन प्रणाली, विद्यालय प्रबंधन समितियों की सक्रिय भूमिका तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों और अधिकारियों ने विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
संगोष्ठी में यह भी चर्चा हुई कि बदलते समय में केवल पाठ्यक्रम पूरा कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, नैतिक मूल्य, नेतृत्व क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी समान रूप से आवश्यक है। संस्था प्रधानों ने अपने-अपने विद्यालयों में किए जा रहे नवाचारों और सफल प्रयोगों को साझा किया, जिससे अन्य विद्यालयों को भी प्रेरणा मिली।
कार्यक्रम में पूर्व प्रधान गोपाल गुर्जर, राजेंद्र बोहरा, पंकज सुगंधी, महावीर सैनी एवं जितेंद्र पाराशर सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, पार्टी पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने शिक्षा के क्षेत्र में सामुदायिक सहयोग बढ़ाने और राजकीय विद्यालयों को उत्कृष्ट बनाने के लिए अपने-अपने स्तर पर सहयोग का भरोसा दिलाया।
संगोष्ठी में क्षेत्र के शिक्षकों तथा छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक सार्थक बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान शिक्षा सुधार, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को लेकर सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का वातावरण बना रहा। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि शिक्षक, अभिभावक, प्रशासन और समाज मिलकर कार्य करें तो राजकीय विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नया खेड़ा परिवार की ओर से सभी अतिथियों, अधिकारियों, संस्था प्रधानों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस द्विदिवसीय वाकपीठ संगोष्ठी में हुए मंथन और लिए गए संकल्प नए शैक्षणिक सत्र में विद्यालयों की कार्यसंस्कृति, शिक्षण गुणवत्ता और विद्यार्थियों के समग्र विकास को नई गति प्रदान करेंगे।