कांग्रेस में कुंवर सौभाग्य सिंह का टिकट कटना चर्चा में, भाजपा में बजरंग सिंह सांखला ने बागी होकर ठोकी ताल
बिजौलिया। नगर पालिका चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला अब केवल एक-दूसरे से नहीं, बल्कि अपने ही खेमे की नाराजगी और बागियों से भी होता दिखाई दे रहा है। टिकट वितरण के बाद कई वार्डों में असंतोष के सुर उभरे हैं, लेकिन वार्ड नंबर 19 ने दोनों पार्टियों की अंदरूनी सियासत को सबसे ज्यादा चर्चा में ला दिया है। यहां कांग्रेस के कद्दावर नेता कुंवर सौभाग्य सिंह को टिकट नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में चर्चाओं का दौर है, वहीं भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे बजरंग सिंह सांखला ने बागी होकर चुनावी मैदान में उतरकर पार्टी के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।
कांग्रेस ने वार्ड 19 से सुरेंद्र पाल सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। इस फैसले के बाद जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव एवं क्षेत्र के पुराने नेता कुंवर सौभाग्य सिंह का टिकट कटना चर्चा का विषय बना हुआ है। सौभाग्य सिंह बिजौलिया क्षेत्र में कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं। ऐसे में उन्हें टिकट नहीं मिलने को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच अलग-अलग राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
कांग्रेस के टिकट वितरण को लेकर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि संगठन और पार्टी कार्यक्रमों में लंबे समय से सक्रिय रहे कई कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिला। कार्यकर्ताओं के एक धड़े का आरोप है कि विधानसभा क्षेत्र के बाहर से आए एक व्यक्ति के इशारे पर पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी रखने वाले कुछ चेहरों को भी चुनावी मैदान में उतार दिया गया। वहीं टिकट वितरण में एक प्रभावशाली समूह की भूमिका को लेकर भी नगर में चर्चाएं हैं, हालांकि पार्टी की ओर से इन चर्चाओं पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वार्ड 19 में भाजपा की राह भी आसान नहीं दिख रही। पार्टी ने यहां लक्ष्मी देवी सोलंकी को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। टिकट की दावेदारी कर रहे बजरंग सिंह सांखला को टिकट नहीं मिला और पार्टी ने उनकी बहन लक्ष्मी देवी सोलंकी पर भरोसा जताया। इसके बाद बजरंग सिंह सांखला ने बागी तेवर दिखाते हुए वार्ड 19 से चुनावी मैदान में ताल ठोक दी। बजरंग सिंह का कहना है कि बहन ने टिकट नहीं मांगा फिर भी टिकट थमा दिया , परिवार को तोड़ने के प्रयास किए। हालांकि इसको लेकर पार्टी की तरफ से कोई बयान नहीं आया है ।
बजरंग सिंह सांखला के मैदान में उतरने से भाजपा के सामने अपने ही वोट बैंक में सेंध लगने की आशंका जताई जा रही है। वहीं कांग्रेस में सौभाग्य सिंह को टिकट नहीं मिलने के बाद कार्यकर्ताओं का रुख क्या रहता है, इस पर भी निगाहें टिकी हैं।
इस तरह वार्ड 19 में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने अंदरूनी समीकरणों में उलझे नजर आ रहे हैं। कांग्रेस के सामने पुराने और सक्रिय नेताओं की नाराजगी को साधने की चुनौती है तो भाजपा के सामने बागी उम्मीदवार से होने वाले संभावित नुकसान को रोकने की।
कांग्रेस के सुरेंद्र पाल सिंह, भाजपा की लक्ष्मी देवी सोलंकी और बागी होकर मैदान में उतरे बजरंग सिंह सांखला के चलते वार्ड 19 का चुनावी मुकाबला अब पूरे बिजौलिया में चर्चा का केंद्र बन गया है।
अब सवाल यह है कि वार्ड 19 में पार्टी का सिंबल भारी पड़ेगा या बागियों और नाराज कार्यकर्ताओं का असर चुनावी गणित बदल देगा? नाम वापसी के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ होगी, लेकिन फिलहाल वार्ड 19 ने बिजौलिया नगर पालिका चुनाव में भाजपा-कांग्रेस दोनों की धड़कनें जरूर बढ़ा दी हैं।
