35 वार्डों में कांग्रेस 22 पर, भाजपा सिर्फ 8 पर सिमटी; 5 निर्दलीयों ने भी मारी बाजी—विधायक डॉ. लालाराम बैरवा के गढ़ में कांग्रेस ने छीन लिया पालिका बोर्ड
नगर कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सेन बोले—‘जनता ने भाजपा के ट्रिपल इंजन को पंक्चर कर दिया’
शाहपुरा | मूलचन्द पेसवानी
शाहपुरा नगर पालिका चुनाव के नतीजों ने शहर की सियासत का पूरा गणित बदल दिया है। भाजपा की प्रदेश में सरकार, शाहपुरा में भाजपा विधायक और निवर्तमान पालिका बोर्ड में भाजपा का दबदबा—इन तमाम सियासी समीकरणों के बावजूद जनता ने नगर पालिका की सत्ता कांग्रेस के हाथों सौंप दी।
शाहपुरा नगर पालिका के 35 वार्डों के चुनाव परिणामों में कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। भाजपा को महज 8 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि 5 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मार ली।
यानी अब शाहपुरा की नगर सरकार बनाने के लिए कांग्रेस को किसी जोड़-तोड़ या बाहरी सहारे की जरूरत नहीं है। 22 पार्षदों के साथ कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से काफी आगे निकल गई है।
और यही इस चुनाव का सबसे बड़ा सियासी संदेश है।
भाजपा के ‘ट्रिपल इंजन’ पर जनता का ब्रेक!
चुनाव से पहले भाजपा की ओर से शाहपुरा में ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ का नारा जोर-शोर से सामने आया था। प्रदेश में भाजपा की सरकार, शाहपुरा से भाजपा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा और नगर पालिका में भाजपा का बोर्ड—इन तीनों को विकास के लिए मजबूत राजनीतिक ताकत के तौर पर पेश किया गया था।
लेकिन चुनाव परिणाम ने इस पूरे राजनीतिक समीकरण को उलट दिया।
जनता ने पालिका की चाबी भाजपा के बजाय कांग्रेस को थमा दी।
नगर कांग्रेस अध्यक्ष और वार्ड 15 से विजयी रमेश सेन ने परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
“जनता ने भाजपा के ट्रिपल इंजन को पंक्चर कर दिया।”
रमेश सेन के इस बयान ने शाहपुरा के चुनावी परिणाम की राजनीतिक तस्वीर को एक ही लाइन में समेट दिया।
विधायक भाजपा के, लेकिन बोर्ड कांग्रेस का
शाहपुरा चुनाव परिणाम की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा यही है कि शहर में भाजपा के विधायक डॉ. लालाराम बैरवा होने के बावजूद नगर पालिका में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया।
भाजपा के लिए यह परिणाम इसलिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि चुनाव के दौरान पार्टी ने स्थानीय स्तर पर विकास और सत्ता के बेहतर समन्वय को लेकर मतदाताओं के सामने अपना पक्ष रखा था।
वहीं कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों, पार्टी के अंदरूनी समीकरणों और भाजपा के प्रति नाराजगी को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश की।
अब परिणाम सामने हैं और आंकड़े साफ हैं—
कांग्रेस—22
भाजपा—8
निर्दलीय—5
राजनीति में इससे बड़ा फैसला और क्या होगा?
टिकट वितरण की नाराजगी भी बनी चर्चा का मुद्दा
चुनाव के दौरान भाजपा में टिकट वितरण को लेकर असंतोष की चर्चाएं सामने आई थीं। कई वार्डों में टिकट को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी और बागी तेवरों की चर्चा रही।
इसके साथ ही शाहपुरा जिला बहाली आंदोलन और विधायक की कार्यशैली को लेकर मतदाताओं के बीच चल रही चर्चाएं भी चुनावी माहौल का हिस्सा बनीं।
हालांकि इन कारणों का वास्तविक प्रभाव कितना रहा, इसका सटीक आकलन अलग-अलग राजनीतिक विश्लेषण का विषय हो सकता है, लेकिन परिणामों ने यह जरूर साबित किया कि भाजपा अपने पिछले स्थानीय निकाय प्रदर्शन को दोहरा नहीं सकी।
कांग्रेस ने 22 सीटों के साथ एकतरफा बढ़त बना ली।
कांग्रेस खेमे में जश्न, सड़कों पर निकला विजय जुलूस
मतगणना के दौरान जैसे-जैसे कांग्रेस के पक्ष में परिणाम आते गए, पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ता गया। अंतिम तस्वीर साफ होते ही कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई।
मतगणना केंद्र और बस स्टैंड क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्र हुए। विजयी प्रत्याशियों को बधाइयां दी गईं और कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर जीत का जश्न मनाया।
लंबे समय बाद शाहपुरा नगर पालिका की सत्ता कांग्रेस के पक्ष में स्पष्ट बहुमत के साथ आती दिखाई दी तो पार्टी कार्यकर्ताओं के चेहरों पर जीत की चमक साफ नजर आई।
अब अगला सवाल—कौन बैठेगा चेयरमेन की कुर्सी पर?
चुनाव परिणाम ने कांग्रेस के सामने जीत की खुशी के साथ अगला बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है।
चेयरमेन कौन?
कांग्रेस के पास 22 पार्षद हैं और बहुमत स्पष्ट है। ऐसे में अब सबसे ज्यादा चर्चा अध्यक्ष पद को लेकर होगी।
नगर कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सेन ने खुद वार्ड 15 से चुनाव जीत दर्ज की है। इसके अलावा कांग्रेस खेमे में कई अनुभवी चेहरे भी जीतकर आए हैं।
अब कांग्रेस के सामने चुनौती सरकार बनाने की नहीं, बल्कि अध्यक्ष पद के लिए सर्वसम्मति बनाने की है।
राजनीति का अगला अध्याय यहीं से शुरू होगा।
क्योंकि चुनाव जीतना एक बात है…
लेकिन 22 पार्षदों को एक साथ लेकर अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचना दूसरी बात।
35 वार्डों का पूरा चुनावी हिसाब
शाहपुरा नगर पालिका के 35 वार्डों में मतदाताओं ने इस बार किसे चुना, तस्वीर इस प्रकार रही—
वार्ड विजेता दल
1 तबस्सुम बानू कांग्रेस
2 युवराज रेगर कांग्रेस
3 जाकिर देशवाली कांग्रेस
4 चांद मोहम्मद रंगरेज निर्दलीय
5 युसुफ मोहम्मद निर्दलीय
6 नतन ओझा कांग्रेस
7 राजेंद्र बोहरा भाजपा
8 मधु सर्वा कांग्रेस
9 रचना मिश्रा कांग्रेस
10 नाथू कोली कांग्रेस
11 योगेश पारीक निर्दलीय
12 भावना सेन कांग्रेस
13 रेखा देवी कांग्रेस
14 सुरेश कहार भाजपा
15 रमेश सेन कांग्रेस
16 बालमुकंद तोषनीवाल कांग्रेस
17 किशन कहार कांग्रेस
18 लादूराम चावला कांग्रेस
19 ममता चावला कांग्रेस
20 सनील चौधरी कांग्रेस
21 निरमा बाबर भाजपा
22 प्रवीण सोनी भाजपा
23 मधु पोंडरीक कांग्रेस
24 सुरेश घुसर निर्दलीय
25 मोहन गुर्जर भाजपा
26 मोहम्मद इशाक कांग्रेस
27 शमीम बानू कांग्रेस
28 नारायण कहार भाजपा
29 ललिता कहार भाजपा
30 राजू कहार निर्दलीय
31 चेतन रेगर कांग्रेस
32 शांति कहार कांग्रेस
33 दीपिका वैष्णव भाजपा
34 युसुफ खान कांग्रेस
35 विशाल मीणा कांग्रेस
कांग्रेस के 22, भाजपा के 8 और निर्दलीयों के 5
पूरे परिणाम को अगर आंकड़ों की भाषा में देखें तो तस्वीर और भी स्पष्ट है।
35 में 22 सीटें कांग्रेस के खाते में गईं।
यानी कांग्रेस को कुल वार्डों के 60 प्रतिशत से ज्यादा में जीत मिली।
भाजपा 8 वार्डों तक सीमित रही, जबकि 5 निर्दलीय भी अपनी राजनीतिक जमीन बचाने में सफल रहे।
निर्दलीयों की पांच सीटें भी आने वाले समय में स्थानीय राजनीति में अपनी अलग भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन मौजूदा आंकड़ों में कांग्रेस को किसी समर्थन की आवश्यकता नहीं है।
शाहपुरा की सियासत में नई पारी
यह परिणाम सिर्फ नगर पालिका के बोर्ड बदलने तक सीमित नहीं माना जाएगा। इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जाएंगे।
भाजपा के लिए यह आत्ममंथन का समय है—
कहां समीकरण बिगड़े?
कहां प्रत्याशी चयन भारी पड़ा?
कहां स्थानीय नाराजगी वोट में बदली?
और सबसे बड़ा सवाल—विधायक के प्रभाव के बावजूद पालिका में पार्टी बहुमत क्यों नहीं ला सकी?
दूसरी ओर कांग्रेस के सामने अब जीत को विकास में बदलने की चुनौती होगी।
जनता ने कांग्रेस को 22 पार्षद देकर स्पष्ट जनादेश दिया है। अब जनता की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नई नगर पालिका किस तरह शहर की समस्याओं और लंबित विकास कार्यों को आगे बढ़ाती है।
चुनाव खत्म… लेकिन शाहपुरा की राजनीति अभी शुरू हुई है
शाहपुरा के मतदाताओं ने अपना फैसला सुना दिया है।
भाजपा के पास सरकार थी, विधायक था और निवर्तमान बोर्ड का अनुभव था।
कांग्रेस के पास विपक्ष की भूमिका थी।
निर्दलीयों के पास अपने-अपने वार्डों का समीकरण था।
लेकिन जब वोट गिने गए तो तस्वीर बदल चुकी थी।
कांग्रेस 22—बहुमत के साथ सत्ता के दरवाजे पर।
भाजपा 8—सत्ता से बाहर।
निर्दलीय 5—अपनी ताकत के साथ मैदान में।
अब शाहपुरा की राजनीति का अगला सवाल यही है—
22 पार्षदों वाली कांग्रेस में चेयरमेन कौन?
और उससे भी बड़ा सवाल—
क्या कांग्रेस इस जनादेश को शाहपुरा के विकास के जनादेश में बदल पाएगी?
मतदाता ने अपना काम कर दिया है।
अब बारी नई नगर सरकार की है।
