BHILWARA

*खेरुणा में भागवत कथा के तीसरे दिन कर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश*


शक्करगढ़

खेरुणा ग्राम में आयोजित हरि बोल श्रीमद् पुरुषोत्तम भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास सत्यनारायण महाराज ने श्रद्धालुओं को कर्म, भक्ति और सदाचार का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि कर्म मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं और मनुष्य को सदैव धर्म एवं सत्कर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।


महाराज ने कहा कि भगवान से सच्चे मन से प्रार्थना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भले ही मनुष्य का शरीर त्रुटियों और पापों से युक्त हो, लेकिन भगवान समदर्शी, दयालु और करुणामय हैं। उनकी शरण में जाने से जीवन का कल्याण होता है।


उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जिस प्रकार पारस पत्थर अपने स्पर्श से किसी भी लोहे को सोना बना देता है, उसी प्रकार भगवान भी भक्त के पूर्व कर्मों और दोषों का विचार किए बिना अपनी कृपा से उसका उद्धार करते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए धर्म के प्रतीक चिह्नों का सम्मान और प्रयोग करना चाहिए।


कथा के दौरान महाराज ने कहा कि मनुष्य का हृदय भगवान का निवास स्थान है, इसलिए उसे सदैव पवित्र रखना चाहिए। बच्चों की प्रथम गुरु माता होती है, जो अपने संस्कारों से उनके व्यक्तित्व का निर्माण करती है। उन्होंने भक्त ध्रुव का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने मात्र पांच वर्ष की आयु में तपस्या कर भगवान की प्राप्ति की थी।
महाराज ने कहा कि प्रेम सभी से करना चाहिए, लेकिन आसक्ति केवल भगवान से रखनी चाहिए। उन्होंने जड़ भरत की कथा के माध्यम से वैराग्य और आत्मज्ञान का संदेश दिया। साथ ही बताया कि पाप मुख्य रूप से आंखों और कानों के माध्यम से मन में प्रवेश करता है, इसलिए इंद्रियों पर नियंत्रण आवश्यक है।
कथा के दौरान उन्होंने अजामिल की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान का नाम मात्र एक बार लेने से भी उसका उद्धार हो गया। इसके अलावा मरुद्गणों की उत्पत्ति, भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान के नरसिंह अवतार के प्राकट्य, देवताओं एवं असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन तथा वामन अवतार द्वारा राजा बलि से तीन पग भूमि मांगने के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया।
कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से कथा का रसपान किया।

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