*श्री चारभुजा मंदिर के 26वें पाटोत्सव का शुभारंभ ,भागवत महात्म्य का हुआ रसपान*

BHILWARA
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ज्ञान, भक्ति और वैराग्य से ही संभव है मानव कल्याण आचार्य शक्तिदेव जी महाराज


भीलवाड़ा, 13 जून। संजय कॉलोनी स्थित श्री चारभुजा मंदिर में श्री चारभुजा मंदिर सेवा समिति एवं महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित 26वें पाटोत्सव महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ हुआ।



पाटोत्सव के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया।

कथा प्रारंभ से पूर्व श्री चारभुजा सेवा समिति के मंत्री अरविन्द जैन ने बताया कि पुरुषोत्तम मास होने से समिति की कार्य कारिणी  मीटिंग में सर्वसम्मति से इस बार 26 वें पाटोत्सव के तहत 12 जून सेआगामी 18 जून तक आचार्य श्री शक्ति देव जी महाराज के सानिध्य में भागवत कथा व  19 जून को भगवान के सम्मुख छप्पन भोग महाप्रसाद के आयोजन का निर्णय लिया ।

  समिति के अध्यक्ष जगदीश चन्द्र देवपुरा, उपाध्यक्ष जगदीश समदानी,   मंत्री अरविन्द जैन कोषाध्यक्ष राम राय गटृटानी, सहमंत्री दिनेश मालीवाल व वरिष्ठ सदस्य रमेश काबरा, सत्य नारायण टेलर, कैलाश पोखरा, मदन गट्टानी, ओम खंडेलवाल, राम निवास डाड ने राष्ट्रीय विचारक एवं ओजस्वी वक्ता कथावाचक आचार्य श्री शक्तिदेव महाराज  का  स्वागत एवं अभिनंदन किया ।
    साथ ही सहयोगी भजन गायक राजू राव, तबला वादक दिनेश चंद्र, निशांत शर्मा, राहुल शर्मा एवं रामकृत मिश्रा का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम में महेश मार्ग महिला मंडल द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया तथा  मंदिर महिला मंडल की सदस्यों ने भगवान श्री चारभुजा नाथ के भजनों की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं।
   “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” के मंगलाचरण के साथ 136वीं श्रीमद्भभागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस में आचार्य श्री शक्तिदेव महाराज ने श्रीमद्भभागवत महापुराण के महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि कलियुग में भगवान की कथा का श्रवण ही मानव जीवन के कल्याण का सर्वोत्तम साधन है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सदाचार, भक्ति और वैराग्य की दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक है।
आचार्य श्री ने कहा कि जिनके हृदय में सच्ची भक्ति का वास होता है, वहां काम, क्रोध और अहंकार टिक नहीं सकते। भागवत श्रवण के लिए ज्ञान, भक्ति और वैराग्य तीनों का होना आवश्यक है। इन तीनों के समन्वय से ही मनुष्य का वास्तविक कल्याण संभव है।
कथा के दौरान उन्होंने आत्मदेव ब्राह्मण, धुंधकारी एवं गोकर्ण के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि आत्मदेव ब्राह्मण की संतान प्राप्ति की इच्छा, धुंधकारी की दुष्प्रवृत्तियां तथा गोकर्ण के ज्ञान एवं वैराग्य ने मानव जीवन को महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। गोकर्ण द्वारा सुनाई गई श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव से धुंधकारी को प्रेतयोनि से मुक्ति प्राप्त हुई, जो भागवत महिमा का अद्भुत उदाहरण है।
आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में “मैं और मेरा” का भाव ही बंधन का कारण है। जब व्यक्ति ममता, आसक्ति और अहंकार का त्याग कर भगवान को अपने हृदय में स्थापित कर लेता है, तब वह भवसागर से पार हो जाता है। उन्होंने साधु-संतों की सेवा, हरि कथा श्रवण, निंदा का त्याग और वैराग्यपूर्ण जीवन को मोक्ष का मार्ग बताया।
उन्होंने पांच प्रकार के बंधनों  “शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध” का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हीं इंद्रियों का सदुपयोग भगवान की भक्ति में करने से जीवन सफल बनता है। आंखों से भगवान के दर्शन, कानों से हरिकथा श्रवण, नासिका से प्रभु के पुष्पों की सुगंध, जिह्वा से प्रसाद ग्रहण तथा स्पर्श से भगवान के चरणों का वंदन मुक्ति के साधन हैं।
आचार्य श्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा एवं नियमपूर्वक सात दिवसीय भागवत कथा का श्रवण करता है तो उसका आध्यात्मिक उत्थान निश्चित है। यहां तक कि कथा का एक वाक्य भी यदि हृदय में उतर जाए तो जीवन का कल्याण संभव हो जाता है।
    कथा के दौरान आचार्य श्री शक्तिदेव महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचन एवं भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश प्रदान किए।
उन्होंने  “तेल चमेली, चंदन साबुन, चाहे लगा लो सेंट, जगत में कोई नही परमानेंट…” भजन के माध्यम से मानव जीवन की क्षणभंगुरता का भावपूर्ण वर्णन किया। भजन सुनकर श्रद्धालु आत्मचिंतन में डूब गए। इसके पश्चात “म्हारा चारभुजा रा नाथ, ओ म्हारा कोटड़ी का श्याम…” भजन की प्रस्तुति ने पूरे पंडाल को भक्तिमय बना दिया। भगवान श्री चारभुजा नाथ के प्रति श्रद्धा और प्रेम से सराबोर श्रद्धालु भजन की धुन पर झूम उठे तथा अनेक श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे।
   कथा के समापन पर श्री चारभुजा नाथ के भजनों एवं ठाकुरजी की आरती के साथ वातावरण भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
   पाटोत्सव एवं कथा महोत्सव के आयोजन में श्री चारभुजा मंदिर सेवा समिति के विद्याधर व्यास ,अनिल खारीवाल, चंद्रेश असावा, विनोद पाराशर, अर्जुन लाल सोनी, दिनेश जैन, दिनेश शारदा, गोविंद गंदोडिया, अक्षत भदादा, सोहन लाल धाकड़, लोकेश आगाल श्यामलाल डाड, मोहन मंत्री, मुकेश कास्ट, श्यामलाल शर्मा,  पंकज रूणवाल, राधेश्याम मोदी, शिव गन्दोडिया, श्याम मंत्री, सुनील काबरा, सुनील हेमराजानी,  जीतू सोनी, प्रदीप बापना, विकास धूपिया ,पवन गोखरू, विमल सोनी, अमित मंत्री, लोकेश टाँक, नारायण लाहोटी, राजेश भदादा, सुनील दरक, सोहन लड्ढा, कमलेश ओझा,दिनेश कोगटा, पवन रूणवाल,  रतन खारीवाल, दिनेश डांगी, शंभू लाल लखारा, राधेश्याम विजयवर्गीय,  अरविंद पाराशर, रामनारायण बांगड़, जगदीश स्वर्णकार, बद्री लाल लाड, शंकर माली, जानकी वल्लभ न्याति,  सतीश शर्मा ,सज्जन सोडाणी, हरि बिरला, अशोक भदादा, मनोज शर्मा , सुशील गन्दोडिया, संजय सुराना, उदय लाल प्रजापत, विमल चपलोत, मनोज पीला ललित बोहरा, शंकर लाल काबरा, महावीर गन्दोडिया एवं महिला मंडल  का विशेष सहयोग रहा। 
कथा मे आरती का लाभ श्री ओमप्रकाश गट्टानी एवं राम राय गट्टानी परिवार द्वारा लिया गया साथ ही  प्रहलाद  नुवाल एवं परिवार द्वारा प्रसाद वितरण का लाभ लिया गया l
    समिति ने श्रद्धालुओं से आगामी दिनों में होने वाली कथा एवं धार्मिक कार्यक्रमों में अधिकाधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया।