*शिवमहापुराण विश्राम पर गूंजा ‘ॐ नमः शिवाय’
-अवतारों, गुरु महिमा और वैराग्य का दिया संदेश
भीलवाड़ा, 14 जून। हरि शेवा उदासीन आश्रम, सनातन मंदिर में सनातन सेवा समिति के तत्वावधान एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी महाराज के सानिध्य में आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा का सप्तम दिवस एवं कथा विश्राम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा स्थल पर पूरे दिन “ॐ नमः शिवाय”, “हर-हर महादेव”, “बम-बम भोले” और “जय शिव शंकर” के जयघोष गूंजते रहे। कथा व्यास परम पूज्य प्रखर वक्ता डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज (काशी) ने समापन दिवस पर भगवान शिव के विविध अवतारों एवं दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शिव समय- समय पर धर्म की स्थापना और जीवों के कल्याण के लिए विभिन्न स्वरूपों में अवतरित होते हैं। उन्होंने ब्रह्मा अवतार, अर्धनारीश्वर अवतार सहित शिव के अनेक अवतारों की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया।

अपने प्रेरक संदेश में स्वामी निर्मल दास जी महाराज ने कहा कि धन, संपत्ति और वैभव से प्राणों की रक्षा नहीं की जा सकती, क्योंकि सब कुछ परमात्मा का दिया हुआ है। जब मनुष्य यह भाव स्वीकार कर लेता है कि सब ईश्वर की कृपा है, तब जीवन में चिंता और अहंकार का स्थान नहीं रहता। उन्होंने कहा, “अहम किस बात का, जब सब कुछ प्रभु का दिया हुआ है।” कथा के दौरान त्रिलोकी राजा बलि एवं भगवान वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने तीन पग भूमि दान की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान वामन ने दो पग में संपूर्ण सृष्टि को नाप लिया और तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना शीश समर्पित कर दानशीलता की सर्वोच्च मिसाल प्रस्तुत की। इसके साथ ही बाणासुर के प्रसंग का भी रोचक वर्णन किया गया। स्वामी जी ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु से बड़ा कोई उपदेशक नहीं होता तथा गुरु आज्ञा का पालन ही आध्यात्मिक उन्नति का आधार है। उन्होंने कहा कि भगवान समय-समय पर मनुष्य को मृत्यु के संकेत देते हैं, इसलिए जीवन रहते ही प्रभु की शरण ग्रहण कर भक्ति एवं सत्कर्मों का मार्ग अपनाना चाहिए।
इस अवसर पर भाव पूर्ण भजन “सज-धज के जिस, दिन मौत की शहज़ादी आएगी, न सोना काम आएगा, न चांदी काम आएगी…।” जिसे सुनकर श्रद्धालु वैराग्य और भक्ति भाव से भाव-विभोर हो उठे।
कथा में द्वादश ज्योतिर्लिंगों के महात्म्य का भी वर्णन किया गया। स्वामी जी ने कहा कि ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, पूजन और स्मरण मात्र से मनुष्य के पापों का नाश होता है तथा भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उमा संहिता एवं वायवीय संहिता के प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने शिवतत्त्व, भक्ति, ज्ञान और मोक्ष के रहस्यों को सरल भाषा में समझाया।
कथा के मध्य गाए गए भजन “शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ…” पर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर झूम उठे। समापन अवसर पर प्रसिद्ध श्लोक-
“शिवे भक्ति: शिवे भक्ति: शिवे भक्तिर्भवे भवे।
अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम॥” का भावार्थ समझाते हुए उन्होंने भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा एवं समर्पण का संदेश दिया।
कथा के समापन पर महाआरती संपन्न हुई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि, शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना की। प्रातःकाल आचार्य रोशन शास्त्री एवं उपाचार्य पंडित सत्यनारायण शर्मा के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विष्णु यज्ञ में आहुतियां दिलवाई गईं। यज्ञ में कन्हैया मोरयानी, हरीश-निशा आडवाणी, राजा-वर्षा टिक्यानी, जयराम-वर्षा अभिचंदानी, पल्लवी वच्छानी, अशोक मूंदड़ा एवं धन्नालाल माली सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आहुतियां अर्पित कीं तथा महादेव का अभिषेक किया। आश्रम के संत मायाराम एवं संत गोविंदराम ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के धार्मिक आयोजनों की पूर्णाहुति सोमवार को होगी, जिसमें सभी श्रद्धालुओं से भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया गया है।
