14वां स्मरण पत्र सौंपा, अधिवक्ताओं ने किया न्यायिक कार्य का बहिष्कार; संघर्ष समिति का ऐलान—अब और तेज होगा आंदोलन, चुनाव में भी बनेगा बड़ा मुद्दा
शाहपुरा। मुलचन्द पेसवानी
कभी जिले का गौरव प्राप्त कर विकास की नई उड़ान भरने वाला शाहपुरा आज अपने खोए हुए जिला दर्जे की बहाली के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। एक वर्ष सात माह से जारी यह जनआंदोलन अब और अधिक उग्र एवं व्यापक स्वरूप लेने की ओर बढ़ रहा है। शाहपुरा जिला बहाल करो संघर्ष समिति के नेतृत्व में सोमवार को 28 जुलाई को एक बार फिर “ब्लैक डे” मनाते हुए उपखंड कार्यालय के बाहर सैकड़ों नागरिकों, अधिवक्ताओं और संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने जोरदार नारेबाजी कर सरकार को अपना वादा याद दिलाया। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री के नाम 14वां स्मरण पत्र उपखंड अधिकारी को सौंपते हुए शाहपुरा को पुनः जिले का दर्जा देने की मांग दोहराई गई।
संघर्ष समिति के महासचिव एडवोकेट कमलेश मुंडेतिया ने बताया कि शाहपुरा को पुनः जिला घोषित कराने की लड़ाई किसी राजनीतिक स्वार्थ की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सम्मान, विकास और जनभावनाओं की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि सरकार से बार-बार आग्रह, ज्ञापन और वार्ता के बावजूद आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे जनता में गहरा असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।
हर माह की 28 तारीख बन चुकी है विरोध का प्रतीक
शाहपुरा का जिला दर्जा समाप्त होने के बाद से ही यहां की जनता प्रत्येक माह की 28 तारीख को “ब्लैक डे” के रूप में मना रही है। इसी क्रम में सोमवार को भी बड़ी संख्या में नागरिक काली पट्टियां बांधकर उपखंड कार्यालय पहुंचे और “शाहपुरा जिला बहाल करो”, “वादा निभाओ—जिला लौटाओ” तथा “जनभावनाओं का सम्मान करो” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा एवं संयोजक रामप्रसाद जाट के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए स्मरण पत्र में सरकार को पूर्व में दिए गए सकारात्मक आश्वासन की याद दिलाते हुए तत्काल शाहपुरा को पुनः जिले का दर्जा देने की मांग की गई।
अधिवक्ताओं का बड़ा समर्थन, न्यायिक कार्य रहा ठप
ब्लैक डे के अवसर पर अभिभाषक संस्था शाहपुरा ने भी आंदोलन को खुला समर्थन दिया। संस्था अध्यक्ष आशीष पालीवाल ने न्यायालय में लिखित कार्य स्थगन पत्र प्रस्तुत कर जिले की बहाली की मांग का समर्थन किया। इसके बाद शाहपुरा के सभी न्यायालयों में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार करते हुए संघर्ष समिति के आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। अधिवक्ताओं का कहना था कि शाहपुरा का जिला दर्जा समाप्त होने से आम नागरिकों को न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
14 माह पहले मिला था आश्वासन, अब जनता पूछ रही—वादा कब पूरा होगा?
संघर्ष समिति ने याद दिलाया कि लगभग 14 माह पूर्व जयपुर में मुख्यमंत्री के साथ शाहपुरा विधायक की मौजूदगी में हुई वार्ता में शाहपुरा को पुनः जिला बनाने का सकारात्मक आश्वासन दिया गया था। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बावजूद सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया। इससे लोगों में यह भावना गहराती जा रही है कि उनकी भावनाओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है।
सहसंयोजक सूर्यप्रकाश ओझा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक शाहपुरा को पुनः जिले का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष किसी भी स्थिति में नहीं रुकेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले पंचायती राज एवं नगर निकाय चुनावों से पहले आंदोलन को गांव-गांव और वार्ड-वार्ड तक पहुंचाकर और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
समीक्षा बैठक में बना आंदोलन का नया रोडमैप
ब्लैक डे कार्यक्रम के बाद जिला बहाल करो संघर्ष समिति की समीक्षा बैठक अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में आंदोलन के अगले चरण की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। अध्यक्ष राजोरा ने कहा कि अब आंदोलन को नए स्वरूप में आगे बढ़ाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आगामी नगर निकाय चुनाव में संघर्ष समिति स्वयं चुनाव लड़ने अथवा जिले की मांग का समर्थन करने वाले प्रत्याशियों के पक्ष में खुलकर उतरने पर भी निर्णय ले सकती है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही वार्ड स्तर पर बैठकें आयोजित कर संगठन को और मजबूत बनाया जाएगा तथा जनता से किए गए वादे को पूरा कराने के लिए हर लोकतांत्रिक संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन को कमजोर करने या दबाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से सशक्त जवाब दिया जाएगा।
सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति का आरोप
संघर्ष समिति के संयोजक रामप्रसाद जाट ने आरोप लगाया कि सरकार और उसके प्रतिनिधियों द्वारा आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने दावा किया कि संघर्ष समिति के महासचिव कमलेश मुंडेतिया की बहन, जिनके बच्चे का अहमदाबाद में ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ है और परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, उनका पंचायत समिति शाहपुरा से सहाड़ा स्थानांतरण केवल संघर्ष समिति से जुड़े होने के कारण किया गया है। समिति ने इसे प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को बदले की भावना नहीं, बल्कि विकास और संवाद की भावना से कार्य करना चाहिए।
सरकार से संवाद और संघर्ष के लिए बनी पांच सदस्यीय समिति
बैठक में सरकार के साथ वार्ता तथा संघर्ष समिति के सदस्यों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से पांच सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया। इसमें रामप्रसाद जाट, सूर्यप्रकाश ओझा, उदयलाल बेरवा, माधुलाल रेगर और सत्यनारायण पाठक को प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गईं। समिति का उद्देश्य सरकार से प्रभावी संवाद स्थापित करना और आंदोलन को संगठित दिशा देना रहेगा।
बैठक में संरक्षक राजेन्द्र पाण्डे, उदयलाल बेरवा, दलीचंद खटीक, माधुलाल रेगर, सुरेश घूसर, प्रवीण पारीक, हाजी उस्मान मोहम्मद छिपा, थानमल जीनगर, रज्जाक मोहम्मद सहित अनेक सदस्यों ने अपने विचार रखे और आगामी चुनावों सहित प्रत्येक चरण में संघर्ष समिति के निर्णय के अनुरूप कार्य करने का संकल्प लिया।
ब्लैक डे कार्यक्रम में अभिभाषक संस्था अध्यक्ष आशीष पालीवाल, उपाध्यक्ष अंकित शर्मा, संरक्षक सत्यनारायण पाठक, हाजी उस्मान मोहम्मद छिपा, राजेन्द्र पाण्डे, प्रॉपर्टी एसोसिएशन अध्यक्ष अजय मेहता, रामेश्वरलाल सोलंकी, सुरेश घूसर, उदयलाल बेरवा, प्रवीण पारीक, नूर मोहम्मद रंगरेज, सुरेश गुर्जर, रमेशचंद्र मालू, मदनलाल कंडारा, रामप्रसाद सेन, सुनील मिश्रा, थानमल जीनगर, नजीर मोहम्मद, रामस्वरूप खटीक, ओमप्रकाश सिंधी, अभय गुर्जर, वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोकचंद नौलखा, अमन ओझा, राजेश वर्मा, निखिल व्यास, गजेन्द्रप्रताप सिंह राणावत, अंकित मालू, आशीष भारद्वाज, साक्षी श्रीवास्तव, नाहरसिंह बंजारा सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में एक ही स्वर सुनाई दिया—“शाहपुरा का सम्मान लौटाओ, जिला बहाल कर वादा निभाओ।”
