68 दिन की कठिन साधना ने गढ़ा दिव्य व्यक्तित्व, तीसरी परिक्रमा पूर्ण
आज शाहपुरा पहुंचने पर होगा आत्मीय स्वागत, शहर को मिलेगा अनुभव और ज्ञान का प्रसाद
शाहपुरा -मूलचन्द पेसवानी
शाहपुरा नगर के लिए आज का दिन आध्यात्मिक उल्लास और गौरव से भरा हुआ है। नर्मदा मैया की पावन परिक्रमा तीन बार पूर्ण कर चुके जगदीश शर्मा आज 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार को सायं 5 बजे डाक बंगला परिसर, भीलवाड़ा रोड, शाहपुरा पहुंच रहे हैं। उनके आगमन पर श्रद्धालुओं द्वारा सादगीपूर्ण, आत्मीय और भावनात्मक स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा, जहां नगरवासी उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

आपको बता दे कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि 68 दिनों की कठोर तपस्या, त्याग, संयम और आत्मिक साधना का जीवंत उदाहरण है। 11 फरवरी को प्रारंभ हुई इस परिक्रमा में उन्होंने नर्मदा तट के दुर्गम मार्गों, जंगलों, गांवों और निर्जन क्षेत्रों को पार करते हुए हर परिस्थिति में श्रद्धा और संकल्प को बनाए रखा। तीसरी बार इस कठिन परिक्रमा को पूर्ण करना उनके अटूट विश्वास और आध्यात्मिक समर्पण को दर्शाता है।
परिक्रमा के दौरान उन्होंने प्रतिदिन नर्मदा मैया का स्मरण करते हुए मानस परिक्रमा, पावन स्नान, साधना और सात्विक जीवनशैली को अपनाया। कई बार विपरीत परिस्थितियां आई कभी कठिन मार्ग, कभी मौसम की चुनौती लेकिन हर चुनौती उनके विश्वास के आगे छोटी साबित हुई। इस यात्रा में उन्हें संतों का सान्निध्य, आश्रमों की सात्विक ऊर्जा और ग्रामीण अंचलों की सरलता का भी अनुभव मिला, जिसने उनके मन को और अधिक निर्मल बनाया।
परिक्रमा के अंतिम चरण में जब वे ओंकारेश्वर के निकट पहुंचे, तो भक्ति और भावनाओं का प्रवाह चरम पर था। निमाड़ क्षेत्र की पवित्र माटी में चलते हुए हर कदम शिवमय अनुभव दे रहा था। मांधाता पर्वत पर स्थित ओंकारेश्वर धाम पहुंचकर उन्होंने जल अर्पित किया, परिक्रमा पूर्ण की और कन्या पूजन के साथ इस दिव्य यात्रा को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर पूर्णता प्रदान की। यह क्षण उनके जीवन का अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय पड़ाव बन गया।
68 दिनों की इस साधना में उन्हें जो अनुभव प्राप्त हुए, वे केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। नर्मदा परिक्रमा ने उन्हें जीवन के गूढ़ सत्य सिखाए संयम, धैर्य, सेवा, प्रकृति के प्रति श्रद्धा और आत्मा की शुद्धि का मार्ग। उन्होंने अनुभव किया कि यह यात्रा केवल पैरों से नहीं, बल्कि मन और आत्मा से पूरी होती है।
अब उनके शाहपुरा आगमन के साथ ही यह आध्यात्मिक ऊर्जा नगर में प्रवाहित होने को तैयार है। उनके अनुभव, उनके विचार और उनकी साधना से प्राप्त ज्ञान निश्चित रूप से नगरवासियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। युवा पीढ़ी को जहां जीवन में अनुशासन और लक्ष्य की प्रेरणा मिलेगी, वहीं बुजुर्गों को भक्ति और शांति का नया मार्ग मिलेगा।
विशेष बात यह है कि स्वागत समारोह को पूरी तरह सादगी और आत्मीयता के साथ आयोजित किया जा रहा है, ताकि उनकी तपस्या और सरलता की भावना अक्षुण्ण बनी रहे। भव्यता से अधिक भावनाओं को महत्व देते हुए यह आयोजन एक आध्यात्मिक मिलन का रूप लेगा।
जगदीश शर्मा की यह तीसरी नर्मदा परिक्रमा न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे शाहपुरा के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनका यह संदेश स्पष्ट है कि यदि जीवन में दृढ़ निश्चय, श्रद्धा और समर्पण हो, तो कोई भी साधना असंभव नहीं। दआज उनका स्वागत केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस तप, त्याग और आध्यात्मिक चेतना का सम्मान है, जो समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
