सीआरपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट, गांव ने सिर आंखों पर बिठाया
कोटड़ी
मिट्टी की खुशबू, गांव की गलियां, सीमित संसाधन और आंखों में बड़ा सपना… कोटड़ी के बेटे अभिषेक शर्मा ने इन सबको अपनी ताकत बनाया और कठिन संघर्ष, अनुशासन व अथक मेहनत के दम पर सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट बनकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया। उनकी इस गौरवपूर्ण सफलता से गांव में उत्सव जैसा माहौल है।
शनिवार को कठिन प्रशिक्षण पूरा कर जैसे ही अभिषेक शर्मा अपने गांव कोटड़ी पहुंचे, वैसे ही ग्रामीणों ने उन्हें हाथोंहाथ उठा लिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूलों की वर्षा, जयघोष और युवाओं के जोश के बीच भव्य स्वागत जुलूस निकाला गया। पूरा गांव अपने लाल की उपलब्धि पर गर्व से झूम उठा।



हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर आंख में गर्व था और हर जुबान पर एक ही बात—कोटड़ी का बेटा अब देश की सुरक्षा का अफसर बन गया।
गांव के पुराने बस स्टैंड पर श्रवण सोनी, प्रह्लाद सेन सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने अभिषेक शर्मा का माला पहनाकर व साफा बंधवाकर भव्य अभिनंदन किया। इसके बाद कोटड़ी चारभुजानाथ मंदिर ट्रस्ट परिसर में सुदर्शन गाड़ोदिया, युवा नेता बनवारी शर्मा सहित ट्रस्ट पदाधिकारियों, ग्रामीणों और समाज के गणमान्य लोगों ने उनका सम्मान किया।
इस अवसर पर नोबल पब्लिक सेकेंडरी स्कूल, कोटड़ी परिवार ने भी अपने पूर्व छात्र का विशेष सम्मान किया। विद्यालय के संचालक उमेश वैष्णव ने कहा कि अभिषेक ने बचपन में इसी विद्यालय में शिक्षा ग्रहण की थी। यहां मिली शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और मेहनत की सीख आज उन्हें इस मुकाम तक लेकर आई है। यह पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व का क्षण है।
वहीं बेटे की सफलता से भावुक हुए पिता श्याम सुंदर चोटिया ने अपनी मन्नत पूरी होने पर अनोखी आस्था दिखाई। उन्होंने अपने घर से कोटड़ी श्याम मंदिर तक लोटन यात्रा कर भगवान के दरबार में पहुंचकर शीश नवाया और बेटे की सफलता पर कृतज्ञता प्रकट की। यह दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो उठा।
अभिषेक शर्मा की सफलता यह संदेश देती है कि मंजिल पाने के लिए बड़े शहरों की नहीं, बड़े हौसलों की जरूरत होती है। गांव की साधारण गलियों से निकलकर देश की सबसे बड़ी सुरक्षा बलों में अधिकारी बनना आसान नहीं, लेकिन अभिषेक ने यह कर दिखाया।
आज अभिषेक केवल अपने परिवार के बेटे नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के रोल मॉडल बन चुके हैं। उनकी सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन हालातों के बावजूद सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।
कोटड़ी की धरती ने फिर साबित कर दिया—यहां की मिट्टी में मेहनत है, संस्कार हैं और सपनों को सच करने का जज्बा है।
