नौ प्रकार की भक्ति का किया वर्णन
भगवान भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते है – कृपारामजी महाराज
भीलवाड़ा, 5 जून।
पूरणमल-सम्पत देवी रांदड़ परिवार के तत्वावधान में महेश वाटिका में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस कथा व्यास श्रद्धेय कृपाराम जी महाराज (जोधपुर) ने भगवान की भक्ति, धर्म और सदाचार से परिपूर्ण विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा आरंभ से पूर्व हनुमान चालीसा एवं भजन-कीर्तन के साथ वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कथाव्यास कृपारामजी महाराज ने कहा कि यह सात दिवसीय कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक विद्यालय के समान है, जहां जीवन को सफल और सार्थक बनाने की शिक्षा प्राप्त होती है। उन्होंने श्रीमद्भागवत में वर्णित नवधा भक्ति अर्थात श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य एवं आत्मनिवेदन भक्ति का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि इन नौ प्रकार की भक्ति में से किसी एक को भी अपनाकर मनुष्य भगवान की कृपा प्राप्त कर सकता है।
महाराज श्री ने भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि सच्चा भक्त विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान का स्मरण नहीं छोड़ता। प्रह्लाद की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने नरसिंह अवतार धारण कर भक्त की रक्षा की तथा अधर्म का नाश किया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
कथा के दौरान ऋषभदेव अवतार का वर्णन करते हुए उन्होंने वैराग्य, तप और आत्मकल्याण का संदेश दिया। जड़ भरत प्रसंग के माध्यम से मोह-माया से दूर रहकर ईश्वर चिंतन करने की प्रेरणा दी। अजामिल उद्धार की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान का नाम इतना प्रभावशाली है कि अंत समय में भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करने से जीव का कल्याण हो जाता है।
गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग में महाराज श्री ने कहा कि जब जीव पूर्ण समर्पण भाव से भगवान को पुकारता है, तब प्रभु स्वयं उसकी रक्षा के लिए उपस्थित हो जाते हैं। वहीं वामन अवतार के माध्यम से भगवान की दिव्य लीला और राजा बलि की दानशीलता का महत्व बताया गया। रामावतार का वर्णन करते हुए भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, सत्य, त्याग और धर्मपालन की महिमा का बखान किया।
कथा के प्रमुख आकर्षण के रूप में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग आया, पूरा पांडाल “जय श्रीकृष्ण”, “जय श्रीराधे” तथा “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोषों से गूंज उठा। श्रद्धालु भजन-कीर्तन पर भावविभोर होकर झूम उठे और भगवान के जन्मोत्सव का उल्लासपूर्वक उत्सव मनाया।
कृपारामजी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की दिव्य गंगा है। इसके श्रवण से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा आत्मिक शांति और ईश्वर कृपा की प्राप्ति होती है।
आयोजन समिति के जगदीश सोनी एवं रोहित रांदड़ ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव 8 जून तक प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक महेश वाटिका में आयोजित होगा। उन्होंने अधिकाधिक धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की।

