संस्कार, संस्कृति और सिंधी अस्मिता का संगमरू सिंधु सभा बाल संस्कार शिविर का हुआ भव्य समापन

BHILWARA
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बच्चों ने सिंधी भाषा, भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मोहा मन, प्रतिभागियों व प्रशिक्षकों का हुआ सम्मान
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, भाषा और संस्कारों से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय सिंधु सभा द्वारा पूज्य सिंधी पंचायत के तत्वावधान में आयोजित सिंधु सभा बाल संस्कार शिविर का रविवार को भावपूर्ण वातावरण में औपचारिक समापन किया गया। दिलखुशाल बाग स्थित पूज्य झूलेलाल मंदिर परिसर में आयोजित समापन समारोह में बच्चों की प्रतिभा, उत्साह और सांस्कृतिक चेतना देखते ही बनी। पूरे कार्यक्रम के दौरान सिंधी संस्कृति और भगवान झूलेलाल के प्रति श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
समारोह की शुरुआत भगवान झूलेलाल की आरती एवं वंदना के साथ हुई। इसके बाद शिविर की गतिविधियों और उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। शिविर में भाग लेने वाले बच्चों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर ने उन्हें अपनी संस्कृति, परंपराओं और मातृभाषा से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। बच्चों ने मंच से आत्मविश्वास के साथ विभिन्न प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमुदाय का दिल जीत लिया।
समापन समारोह में बच्चों ने सिंधी भाषा में भजन, गीत, बोली तथा भगवान झूलेलाल पर आधारित आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और यह संदेश दिया कि यदि बच्चों को सही दिशा और मंच मिले तो वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सिंधु सभा के शाहपुरा नगर अध्यक्ष चेतन चंचलानी की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में सिंधु सभा महिला शाखा अध्यक्ष शिल्पा सामतानी, उपाध्यक्ष कविता वासवानी, मंत्री विमला आसवानी एवं सहमंत्री वर्षा मतलानी ने शिविर में शामिल सभी बच्चों को पारितोषिक और स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। बच्चों के चेहरे पर सम्मान प्राप्त करने की खुशी साफ झलक रही थी।
शिविर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली प्रशिक्षक रेखा शर्मा, विमला आसवानी, पाखी लखपतानी और मनीषा आसवानी को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। समाज की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह एवं पारितोषिक देकर उनके योगदान की सराहना की गई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने प्रशिक्षकों के समर्पण और मेहनत की प्रशंसा की।
पूज्य सिंधी पंचायत के मीडिया प्रभारी मूलचन्द पेसवानी ने बताया कि बाल संस्कार शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक संस्कारों, सिंधी भाषा और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जागरूकता विकसित करना था। शिविर के दौरान बच्चों को धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया।
समारोह में पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष लीलाराम वासवानी, सचिव नरेश लखपतानी, कोषाध्यक्ष अशोक थानवानी, सिंधु सभा नगर अध्यक्ष चेतन चंचलानी सहित समाज के अनेक पदाधिकारी, महिला कार्यकर्ता और समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि ऐसे संस्कार शिविर समय की आवश्यकता हैं, क्योंकि आधुनिकता की दौड़ में बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़े रखना समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया। पूरे आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब समाज अपनी संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण के लिए संगठित होकर कार्य करता है तो नई पीढ़ी में भी अपनी पहचान और विरासत के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है। बाल संस्कार शिविर का यह समापन समारोह बच्चों के लिए प्रेरणा, सीख और सांस्कृतिक चेतना का यादगार अवसर बन गया।