नष्टीकरण के आदेश स्थगित करने या खेत में ही जमींदोज करने की अनुमति देने की मांग
बिजोलिया। अफीम उत्पादक किसानों ने डोडा चूरा नष्टीकरण की मौजूदा व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी बिजोलिया को ज्ञापन सौंपा। भारतीय किसान संघ एवं अफीम उत्पादक संघर्ष समिति के बैनर तले दिए गए ज्ञापन में किसानों ने डोडा चूरा के लिए उचित मुआवजा देने तथा वर्तमान व्यवस्था में बदलाव की मांग की।
किसानों का कहना है कि भारत सरकार लाइसेंसधारी किसानों से निर्धारित मानकों के अनुरूप अफीम खरीद लेती है, लेकिन उससे शेष बचने वाले डोडा चूरा के निस्तारण का पूरा भार किसानों पर आ जाता है। वर्ष 2016 तक राज्य सरकार ठेका प्रणाली के माध्यम से डोडा चूरा खरीदती थी, लेकिन व्यवस्था बंद होने के बाद किसानों को इसे जमींदोज करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि राज्य सरकार डोडा चूरा का वजन के आधार पर दो हजार रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मुआवजा दे। यदि यह संभव नहीं हो तो किसानों को अपने खेतों में ही सुरक्षित तरीके से डोडा चूरा नष्ट करने की अनुमति दी जाए। किसानों का तर्क है कि खेत में जमींदोज करने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा और अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया से भी राहत मिलेगी।
किसानों ने ज्ञापन में यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों के कच्चे मकान हैं, जहां डोडा चूरा को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। बारिश या मवेशियों से नुकसान होने का भी खतरा बना रहता है। ऐसे में वर्तमान व्यवस्था किसानों के लिए व्यवहारिक नहीं है।
किसानों ने राज्य सरकार से मांग की है कि जब तक डोडा चूरा पर उचित मुआवजा देने का निर्णय नहीं होता, तब तक नष्टीकरण संबंधी आदेशों को स्थगित किया जाए अथवा किसानों को अपने खेतों में ही इसका निस्तारण करने की अनुमति प्रदान की जाए। इससे किसानों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ खेती को भी लाभ होगा।
