ऐतिहासिक चातुर्मास पधरावणी, 101 स्वागत द्वार और ड्रोन से होगी पुष्पवर्षा
भीलवाड़ा, मूलचन्द पेसवानी
मेवाड़ की धर्मनगरी भीलवाड़ा आगामी 19 जुलाई को आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति के विराट उत्सव का साक्षी बनेगा। अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज वर्ष 2026 का पावन “विश्व शांति कल्याण चातुर्मास” भीलवाड़ा के माणिक्यनगर रामद्वारा में करेंगे। इस अवसर पर निकाली जाने वाली भव्य चातुर्मास पधरावणी शोभायात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
रामस्नेही सम्प्रदाय के साथ-साथ सर्व समाज के श्रद्धालुओं में इस चातुर्मास को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर को धर्ममय वातावरण में रंगने के लिए जगह-जगह स्वागत द्वार, रंगोलियां, सजावट और धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।
सुबह 8:30 बजे होगी भव्य पधरावणी–
विश्व शांति कल्याण चातुर्मास समिति के तत्वावधान में आयोजित होने वाली चातुर्मासिक मंगलमय पधरावणी 19 जुलाई को सुबह 8:30 बजे भव्य शोभायात्रा के साथ प्रारंभ होगी। इससे पहले आचार्यश्री का श्रद्धालुओं द्वारा भावपूर्ण स्वागत किया जाएगा। स्टेशन चौराहे पर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद एवं मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इसके बाद सर्व समाज के श्रद्धालुओं द्वारा महाआरती संपन्न कर शोभायात्रा रवाना होगी।
हाथी-घोड़े, ऊंट, शाही लवाजमा और ड्रोन से पुष्पवर्षा होगी आकर्षण–
इस भव्य शोभायात्रा में सबसे आगे हाथी, घोड़े और ऊंट शाही लवाजमे के साथ चलेंगे। छत्र-चंवर, धार्मिक ध्वज और संत-महात्माओं की उपस्थिति इसे दिव्य स्वरूप प्रदान करेगी। पूरे मार्ग में 101 भव्य स्वागत द्वार बनाए जाएंगे तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से ड्रोन द्वारा पुष्पवर्षा की जाएगी।
शोभायात्रा का एक और प्रमुख आकर्षण उज्जैन की प्रसिद्ध महाकाल आरती की प्रस्तुति देने वाला दल रहेगा, जो पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देगा। मार्ग के दोनों ओर आकर्षक रंगोलियां और पुष्प सज्जा श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगी।
शहर के प्रमुख मार्गों से निकलेगी शोभायात्रा–
शोभायात्रा रेलवे स्टेशन रोड स्थित गजाधर मानसिंहका धर्मशाला से प्रारंभ होकर सरकारी दरवाजा, गोल प्याऊ, बालाजी मार्केट, सूचना केंद्र चौराहा, गांधी बाजार, भीमगंज थाना चौराहा होते हुए माणिक्यनगर रामद्वारा पहुंचेगी, जहां इसका समापन होगा।
देश के विभिन्न राज्यों से हजारों रामस्नेही संत, अनुयायी और श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने के लिए भीलवाड़ा पहुंचेंगे।
तीन माह तक बहेगी धर्म, भक्ति और संस्कृति की अविरल धारा–
चातुर्मास के दौरान भीलवाड़ा में आध्यात्मिक चेतना का अनूठा वातावरण रहेगा। प्रतिदिन प्रातः 5 से 6 बजे तक रामधुनी होगी। सुबह 8 से 8:30 बजे तक वाणीजी का पाठ तथा 8:30 से 9:30 बजे तक आचार्यश्री के प्रेरक प्रवचन होंगे। प्रतिदिन सूर्यास्त के समय संध्या आरती आयोजित की जाएगी। पूरे चातुर्मास में धर्म, भक्ति, संस्कृति और समाज जागरण से जुड़े अनेक आयोजन होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करेंगे।
गुरुपूर्णिमा से अवतरण महोत्सव तक होंगे विशेष आयोजन–
चातुर्मास के दौरान 29 जुलाई को गुरुपूर्णिमा महोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। 13 से 20 सितम्बर तक पूज्य वाणीजी प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8:30 से 11:30 बजे तक होंगे, जबकि दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक भागवत ज्ञान महोत्सव आयोजित किया जाएगा। 25 सितम्बर को रात्रि 8 बजे आचार्यश्री अवतरण महोत्सव के अंतर्गत विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम होगा, जबकि 26 सितम्बर को अवतरण आनंदोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। 15 अक्टूबर को पंचमी गोटकाजी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी तथा 22 अक्टूबर को चातुर्मास का विधिवत समापन होगा।
समाज के प्रतिष्ठित परिवार निभा रहे हैं सहयोग–
विश्व शांति कल्याण चातुर्मास समिति के इस विशाल आयोजन में मुख्य सहयोगी के रूप में रामचरणानुरागी भंवरलाल, अशोककुमार, सुभाषचंद, महेशकुमार, अंकित, राहुल अजमेरा परिवार, लालचंद, शिवकुमार, अशोककुमार, मुकेशकुमार गगराणी परिवार तथा मुरली श्याम ईनाणी परिवार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
तैयारियों के लिए बनीं अलग-अलग समितियां–
समिति के कार्यालय प्रमुख बद्रीनारायण लढ़ा एवं रमेश राठी ने बताया कि चातुर्मास को सुव्यवस्थित एवं ऐतिहासिक बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया है।
इनमें स्वागत समिति, कार्यालय व्यवस्था, स्वागत द्वार निर्माण, प्रशासनिक समन्वय, आमंत्रण पत्र वितरण, क्रय समिति, पांडाल व्यवस्था, स्टोर व्यवस्था, भोजन निर्माण, वाहन पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था, आवास व्यवस्था, प्राथमिक चिकित्सा, लाइट-साउंड व्यवस्था तथा प्रचार-प्रसार समिति सहित अनेक समितियां शामिल हैं।
सभी समितियों के सदस्य पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, जिससे 19 जुलाई को भीलवाड़ा में आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक वैभव का ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा सके।
