नए विद्यार्थियों को प्रवेश प्रक्रिया, अध्ययन सामग्री, असाइनमेंट और परीक्षा प्रणाली की दी विस्तृत जानकारी
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय, शाहपुरा में संचालित वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (वीएमओयू) अध्ययन केंद्र पर एक दिवसीय अभिमुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य नए विद्यार्थियों को दूरस्थ शिक्षा प्रणाली, प्रवेश प्रक्रिया, अध्ययन पद्धति और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देकर उनकी शैक्षणिक यात्रा को सरल और प्रभावी बनाना था।
कार्यशाला में विद्यार्थियों को दूरस्थ शिक्षा के बदलते स्वरूप, उच्च शिक्षा के बढ़ते अवसरों और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय उन विद्यार्थियों के लिए एक बेहतर विकल्प है, जो किसी कारणवश नियमित महाविद्यालय में अध्ययन नहीं कर पाते, लेकिन उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को संवारना चाहते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं वीएमओयू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. दिलीप शर्मा ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी), डिप्लोमा तथा विभिन्न प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेट) पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि दूरस्थ शिक्षा अनुशासन, आत्मविश्वास और नियमित अध्ययन की मांग करती है तथा यह प्रणाली आज लाखों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है।
कार्यशाला में सी.एल. बोराना एवं सुनील माथुर ने भी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की विभिन्न योजनाओं, प्रवेश प्रक्रिया और अध्ययन की उपयोगी जानकारियों से अवगत कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को समय पर असाइनमेंट जमा करने, अध्ययन सामग्री का नियमित अध्ययन करने तथा परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी।
मुख्य कॉर्डिनेटर डॉ. पुष्कर राज मीणा ने दूरस्थ शिक्षा प्रणाली की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए अध्ययन सामग्री (एसएलएम), आंतरिक मूल्यांकन के लिए असाइनमेंट जमा करने की प्रक्रिया तथा परीक्षा प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने और विश्वविद्यालय की ऑनलाइन सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया।
अध्ययन केंद्र समन्वयक प्रो. मूलचंद खटीक ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस प्रकार के अभिमुखीकरण कार्यक्रम विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान करने और उन्हें विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला में विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई तथा प्रवेश, परीक्षा, अध्ययन सामग्री, ऑनलाइन सेवाओं और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक समाधान किया।
इस अवसर पर प्रो. रामावतार मीना, डॉ. ऋचा अंगिरा, प्रो. धर्मनारायण वैष्णव, प्रो. दिग्विजय सिंह, प्रो. मुकेश कुमार मीणा, प्रो. विजय परमार, सुरेश पेसवानी, रवि कौली सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्य तथा एम.एससी. पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध रसायनशास्त्र शिविर में भाग लेने वाले विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यशाला के समापन पर विद्यार्थियों ने इसे उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें दूरस्थ शिक्षा प्रणाली की बेहतर समझ मिली और अब वे अपने अध्ययन को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकेंगे।
