घंटों कतार में खड़े रहकर श्रद्धालुओं ने किया गुरु पूजन, महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश पुरी महाराज से लिया मंगल आशीर्वाद
शक्करगढ़, 29 जुलाई।
आस्था से झुके शीश, हृदय में समर्पण का भाव और मुख पर गुरु महिमा का गुणगान—बुधवार को शक्करगढ़ स्थित श्री अमर ज्ञान निरंजनी आश्रम एवं श्री संकट मोचन आदर्श गौशाला में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान श्रद्धा और भक्ति का ऐसा ही अलौकिक दृश्य दिखाई दिया। गुरु दर्शन एवं पूजन के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। सुबह से शुरू हुआ श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम कई घंटों तक जारी रहा और पूरा आश्रम परिसर गुरुभक्ति, आस्था एवं आध्यात्मिक उल्लास के रंग में सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आचार्य विग्रह पूजन के साथ हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य गुरु महामंडलेश्वर स्वामी श्री जगदीश पुरी जी महाराज का पूजन कर उनके चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए। महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने कई घंटे तक कतार में खड़े रहकर अपनी बारी की प्रतीक्षा की और गुरु पूजन के बाद स्वामी जी से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरु पूर्णिमा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने पूर्ण भक्तिभाव के साथ गुरु चरणों में शीश नवाते हुए अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति एवं कल्याण की कामना की। गुरु महिमा के जयघोष और भक्ति भजनों से आश्रम परिसर गुंजायमान रहा।
गुरु जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर करते हैं—स्वामी जगदीश पुरी
महामंडलेश्वर स्वामी श्री जगदीश पुरी जी महाराज ने अपने मंगल संदेश में गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्व गुरु के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का पावन अवसर है। गुरु ही शिष्य के जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान, संस्कार और सद्मार्ग का प्रकाश फैलाते हैं। माता-पिता मनुष्य को जन्म देते हैं, लेकिन सद्गुरु उसे जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करते हुए परमात्मा से मिलन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य गुरुकुल से गूगल तथा आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग तक पहुंच गया है। इन साधनों से जानकारी प्राप्त करना भले ही आसान हो गया हो, लेकिन सत्य-असत्य की पहचान, जीवन मूल्यों की समझ और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता आज भी गुरु के सानिध्य एवं श्रेष्ठ संस्कारों से ही विकसित होती है। जीवन में कितनी ही उपलब्धियां प्राप्त हो जाएं, गुरु के मार्गदर्शन के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा रहता है।
गुरु के उपदेशों को जीवन में उतारना ही सच्ची पूजा
स्वामी जगदीश पुरी महाराज ने कहा कि गुरु की वास्तविक पूजा केवल चरण वंदना करने अथवा पुष्प अर्पित करने तक सीमित नहीं है। गुरु के बताए सत्य, सेवा, सदाचार, संयम और परोपकार के मार्ग पर चलना तथा उनके उपदेशों को अपने आचरण में उतारना ही सच्ची गुरु भक्ति है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, संस्कार, करुणा और मानव सेवा को जीवन में सर्वोच्च स्थान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि गुरु शिष्य को केवल धार्मिक ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की शक्ति भी प्रदान करते हैं। गुरु के प्रति श्रद्धा तभी सार्थक होती है, जब शिष्य अपने अहंकार, बुराइयों और दुर्गुणों का त्याग कर सद्मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है। यही गुरु पूर्णिमा पर्व का वास्तविक संदेश और सच्ची सार्थकता है।
भक्ति भजनों के बीच चलता रहा गुरु पूजन
इससे पूर्व आश्रम के आचार्य ब्रह्मचारी हंस चैतन्य महाराज ने गुरु भक्ति के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान ब्रह्मचारी नारायण चैतन्य एवं महेंद्र चैतन्य ने सुमधुर भक्ति भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भजनों के बीच कई घंटों तक गुरु पूजन और दर्शन का क्रम अनवरत चलता रहा।
विशिष्ट सेवाएं देने वालों का किया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान आश्रम में विशिष्ट सेवाएं देने वाले वयोवृद्ध ट्रस्टी टी.सी. चौधरी, हेमचंद सुरतानिया, भंवरलाल पाराशर, सावित्री देवी पाराशर, कमल शर्मा, राकेश, डॉ. युवराज, देवली के डॉक्टर अनंत जैन कालूराम, द्रौपदी मीणा, वेदप्रकाश खटीक तथा विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता एवं सहायक अभियंता का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा एवं जहाजपुर पंचायत समिति प्रधान कौशल शर्मा के पति किशोर कुमार शर्मा ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से महामंडलेश्वर स्वामी श्री जगदीश पुरी जी महाराज का सम्मान किया।
महाप्रसादी में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित महाप्रसादी भंडारे के पुण्यार्जक केकड़ी निवासी रामकिशन माहेश्वरी, उषा जेथेलिया एवं अमित माहेश्वरी रहे। महाप्रसादी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पंगत प्रसाद ग्रहण किया।
इस मौके पर आश्रम के ट्रस्टी सुरेशचंद्र रुइया, जगदीश स्वरूप मेवाड़ा, पूरण कुमार करिहा, शिवरतन मूंदड़ा, भंवरसिंह राठौड़, भंवरलाल झंवर, रामेश्वर मीणा, रमेशचंद सोमानी और हुकुमसिंह राठौड़ सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन आश्रम के ट्रस्टी सुरेंद्र जोशी ने किया।
दिनभर चले गुरु पूजन एवं दर्शन के दौरान आश्रम परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में नमन कर जीवन में सेवा, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के चलते पूरा शक्करगढ़ क्षेत्र गुरुभक्ति के रंग में रंगा दिखाई दिया।
