महर्षि श्रृंगी ऋषि के बताए मार्ग पर चलने का लिया संकल्प, होनहार विद्यार्थियों का हुआ सम्मान

BHILWARA
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शाहपुरा -मूलचन्द पेसवानी
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सिखवाल समाज द्वारा फूलियागेट स्थित लालदासजी की बगीची में अवस्थित महर्षि श्रृंगी ऋषि मंदिर में श्रद्धा, आस्था और सामाजिक एकता का भव्य संगम देखने को मिला। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-पूजन, भजन-कीर्तन और प्रतिभा सम्मान समारोह के बीच समाजजनों ने महर्षि श्रृंगी ऋषि के आदर्शों पर चलने तथा समाज की उन्नति एवं संगठन को सशक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।


सिखवाल समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं शाहपुरा इकाई के अध्यक्ष सूर्यप्रकाश ओझा ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित नागजीराम एवं हरिनारायण  के सान्निध्य में वैदिक विधि-विधान से हवन, शांति पाठ, पूजा-अर्चना एवं महाआरती के साथ हुआ। समाजजनों ने अपने आराध्य एवं कुलगुरु महर्षि श्रृंगी ऋषि के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर समाज की सुख-समृद्धि, प्रगति और आपसी सौहार्द की कामना की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने मंदिर प्रांगण में भक्ति रस से ओतप्रोत भजन-कीर्तन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गुरु महिमा और भारतीय संस्कृति से जुड़े भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
इस अवसर पर समाज के मेधावी एवं होनहार विद्यार्थियों का भी उत्साहवर्धन किया गया। स्वर्गीय श्री रमेशचंद्र ओझा स्मृति संस्थान की ओर से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कार प्रदान किए गए। वक्ताओं ने कहा कि प्रतिभाओं का सम्मान समाज के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है और इससे युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व अध्यक्ष सोमेश्वर व्यास एवं विजय व्यास तथा स्वर्गीय श्री रमेशचंद्र ओझा स्मृति संस्थान के अखिल व्यास ने समाज के भामाशाहों द्वारा कराए गए विभिन्न विकास कार्यों की जानकारी देते हुए उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज की उन्नति सामूहिक सहयोग, शिक्षा और संगठन की शक्ति से ही संभव है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में सूर्यप्रकाश ओझा ने समाजजनों से सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने, संगठन को मजबूत बनाने तथा सेवा और समर्पण की भावना के साथ समाजहित में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल गुरु वंदना का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन, संस्कार और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन का भी संदेश देती है। यदि समाज एकजुट होकर कार्य करेगा तो विकास की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करना सहज होगा।
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। आत्मीयता और भाईचारे के वातावरण में संपन्न हुआ यह आयोजन समाज में धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और संगठनात्मक एकजुटता का प्रेरक संदेश देकर संपन्न हुआ।