*शाहपुरा में पहली बार गूंजेगा महाकाल का जयघोष, गायत्री शक्तिपीठ पर शिव परिवार की प्राण-प्रतिष्ठा का शुभारंभ*

BHILWARA
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शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
धर्मनगरी शाहपुरा की आध्यात्मिक धरती पर सोमवार को आस्था का एक नया अध्याय शुरू हुआ। उम्मेदसागर रोड स्थित गायत्री शक्तिपीठ परिसर में महाकाल मंदिर एवं शिव परिवार की प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का विधिवत आगाज हुआ। खास बात यह है कि शाहपुरा में बनने वाला यह महाकाल का पहला मंदिर होगा। आयोजन गायत्री परिवार के तत्वावधान में हो रहा है।
महाकाल मंदिर को गायत्री शक्तिपीठ के मुख्य द्वार के समीप आकर्षक स्वरूप में तैयार कराया गया है। मंदिर निर्माण के साथ ही यहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं और शिवभक्तों में खासा उत्साह नजर आया। आयोजन स्थल पर सुबह से ही भक्ति और अध्यात्म का माहौल दिखाई दिया।
नर्मदेश्वर मंदिर से निकली मंगल कलश और जागरूकता यात्रा


महोत्सव के प्रथम दिन भीलवाड़ा रोड स्थित नर्मदेश्वर मंदिर से मंगल कलश एवं जागरूकता यात्रा निकाली गई। यात्रा के शुभारंभ से पहले सभी कलशों का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद शिवभक्तों और गायत्री परिवार के उपासकों ने उत्साह के साथ यात्रा शुरू की।
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के हाथों में केवल कलश ही नहीं, बल्कि गायत्री परिवार के संस्कार, सद्विचार और जनजागरण से जुड़े संदेशों की तख्तियां भी थीं। वातावरण में धार्मिक जयघोष के साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले संदेश गूंजते रहे। यात्रा ने धार्मिक आयोजन को जनजागरण से जोड़ने का संदेश दिया।
श्रद्धालुओं के बीच महाकाल के प्रति आस्था और गायत्री परिवार की साधना-पद्धति का अनूठा संगम देखने को मिला। यात्रा के दौरान भक्तिमय वातावरण ने पूरे माहौल को शिवमय बना दिया।
गायत्री शक्तिपीठ पहुंचते ही हुआ भव्य स्वागत
गायत्री शक्तिपीठ पहुंचने पर मंगल कलश यात्रा का विधि-विधान से स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। गायत्री परिवार के ट्रस्टी दुर्गालाल जोशी ने बताया कि यात्रा में शामिल सभी श्रद्धालुओं का सम्मानपूर्वक स्वागत करने के बाद प्रसाद स्वरूप अल्पाहार कराया गया।
उन्होंने बताया कि महाकाल मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर गायत्री परिवार के पदाधिकारी, ट्रस्टीगण और शिवभक्त पूरी श्रद्धा के साथ आयोजन में जुटे हुए हैं। मंदिर में भगवान शिव के साथ शिव परिवार की स्थापना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
अभिजीत मुहूर्त में शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान
महोत्सव के प्रथम दिन अपराह्न अभिजीत मुहूर्त में धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ किया गया। पं. अशोक पौंडरीक के संयोजन एवं अगुवाई में दूर्वा पूजन, हवन तथा मूर्तिवास सहित विभिन्न वैदिक अनुष्ठान शुरू हुए।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होने वाले इन अनुष्ठानों से गायत्री शक्तिपीठ का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। हवन की सुगंध, मंत्रों की गूंज और शिवभक्ति के जयघोष ने आयोजन को विशेष बना दिया।
शाम को होगा विशाल दीप यज्ञ
महोत्सव के प्रथम दिन शाम को गायत्री शक्तिपीठ परिसर में विशाल दीप यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। गायत्री परिवार की परंपरा के अनुरूप दीप यज्ञ के माध्यम से सामूहिक साधना, सद्बुद्धि, संस्कार और समाज में सकारात्मक चेतना का संदेश दिया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार दीप यज्ञ में बड़ी संख्या में गायत्री उपासकों और शिवभक्तों के शामिल होने की संभावना है। दीपों की रोशनी और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होने वाला यह आयोजन महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा।
मंगलवार को प्राण-प्रतिष्ठा और शिवाभिषेक
गायत्री परिवार के ट्रस्टी दुर्गालाल जोशी ने बताया कि महोत्सव के मुख्य धार्मिक कार्यक्रम 25 अगस्त मंगलवार को सुबह 9.15 बजे से होंगे। इस दौरान हवन, प्राण-प्रतिष्ठा और भगवान शिव का विधि-विधान से शिवाभिषेक कराया जाएगा। धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्णाहुति के साथ महोत्सव का मुख्य चरण संपन्न होगा।
प्राण-प्रतिष्ठा के बाद महाकाल मंदिर में भगवान शिव एवं शिव परिवार की विधिवत स्थापना होगी। इसके पश्चात दोपहर में महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
महाकाल की भक्ति और गायत्री साधना का संगम
शाहपुरा में महाकाल मंदिर की स्थापना केवल एक नए मंदिर के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आस्था, संस्कार, साधना और जनजागरण के संगम के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर भगवान महाकाल की आराधना और शिव परिवार की उपासना होगी, वहीं दूसरी ओर गायत्री परिवार की विचारधारा के अनुरूप यज्ञ, संस्कार और समाज जागरण का संदेश भी लोगों तक पहुंचेगा।
महाकाल की नगरी उज्जैन की तर्ज पर भगवान शिव के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्तों के लिए शाहपुरा में यह मंदिर एक नया धार्मिक केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यहां नियमित धार्मिक गतिविधियों से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण उपलब्ध होने की उम्मीद है।
महोत्सव को लेकर गायत्री परिवार के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और शिवभक्तों में उत्साह बना हुआ है। मंदिर की स्थापना के साथ ही शाहपुरा की धार्मिक पहचान में एक और अध्याय जुड़ने जा रहा है।