*भाजपा का बड़ा बयान – सी फॉर कांग्रेस या सी फॉर कन्फ्यूज्ड*

*संवैधानिक ज्ञान से कोसों दूर कांग्रेस की ओबीसी आरक्षण और बिल तत्काल लागू करने की मांग महिला आरक्षण को उलझाने का षड्यंत्र – मेवाड़ा*
*ब्यूरो चीफ पुनित चपलोत*
भीलवाड़ा। भाजपा ने महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा दुष्प्रचार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि सी फॉर कांग्रेस कहें या सी फॉर कन्फ्यूज्ड एक ही बात है। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा ने कहा कि कांग्रेस संवैधानिक ज्ञान से कोसों दूर है। ओबीसी महिलाओं के आरक्षण और बिल तत्काल लागू की मांग महिला आरक्षण को उलझाने का षड्यंत्र मात्र है।
जिला प्रवक्ता अंकुर बोरदिया ने बताया कि भारत के संविधान के अनुसार केवल एससी और एसटी के लिए ही राजनीतिक आरक्षण का प्रावधान है। कांग्रेस ओबीसी महिलाओं के कोटे की बात कर रही है तो इसके लिए एक नया संवैधानिक संशोधन जरूरी है। इसका सीधा मतलब है कि नया संशोधन, नई बहस और फिर से लंबी प्रक्रिया। और वहीं दूसरी तरफ वे कह रहे हैं कि बिल तुरंत लागू करो। अब कांग्रेस ये बताए कि क्या वे जानबूझकर नया अड़ंगा डालना चाहते हैं ताकि बिल फिर से कानूनी और संवैधानिक दांवपेचों में लटक जाए ? और जब अगर 2010 में कांग्रेस ने राज्यसभा में बिल पास किया था, तब उन्हें महिलाओं का ओबीसी कोटा याद क्यों नहीं आया था ?
*महिला सीटों के आरक्षण के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी*
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता बार-बार यह आरोप लगा रहे हैं कि जब महिला आरक्षण देना था तो उसे जनगणना और परिसीमन से क्यों जोड़ा। शायद कांग्रेस के पास अनुभव की कमी है क्योंकि आरक्षण के लिए सबसे पहले यह तय करना होता है कि कौन सी सीट महिला के लिए आरक्षित होगी। यह तय करने का अधिकार सरकार के पास नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र परिसीमन आयोग के पास होता है। संविधान के अनुसार सीटों का फेरबदल केवल जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही हो सकता है। यदि भाजपा बिना डेटा के सीटें आरक्षित कर दे, तो कांग्रेस ही कल उसे कानून का सहारा लेकर उलझा देगी। मोदी सरकार ने इसे जनगणना से इसलिए जोड़ा ताकि यह सशक्त कानून बन सके। भाजपा महिलाओं को स्थायी हक देना चाहती है, चुनावी झुनझुना पकड़ाने का काम कांग्रेस का है।
*गजट नोटिफिकेशन जारी करना संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा*
मेवाड़ा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियमानुसार अधिसूचित करना सरकार की जिम्मेदारी है। 16 अप्रैल 2026 से इसे प्रभावी बनाया गया है ताकि परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया को संवैधानिक मान्यता मिल सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 30 साल तक इस फाइल पर धूल जमाई, मोदी सरकार ने उस धूल को साफ कर इसे हकीकत में बदला है। नोटिफिकेशन जारी होना इस बात का सबूत है कि अब यह कानून बन चुका है और इसे दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती।
अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस को डर है कि अब उनके पास राजनीति करने के लिए कोई मुद्दा तो बचा नहीं, इसलिए वे जनता को गुमराह करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। लेकिन देश की आधी आबादी कांग्रेस के बातों में आने वाली नहीं है। इस तरह झूठ की दुकान खोलकर कांग्रेस अपना बचा हुआ जनाधार भी खो रही है।



