श्रीमद्भागवत कथा में संस्कार, सेवा और भक्ति का दिया संदेश, बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित
बड़लियास ( रोशन वैष्णव)
श्री मुनिकुल ब्रह्मचर्याश्रम वेद संस्थानम् में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक कुलदीप शर्मा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि माता-पिता एवं सद्गुरु की सेवा ही जीवन का सर्वोच्च धर्म है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश की सेवा से जो पुण्य प्राप्त होता है, वही पुण्य माता-पिता की निस्वार्थ सेवा एवं सम्मान से भी मिलता है।
कथा में उन्होंने बताया कि ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता हैं, उसी प्रकार माता-पिता हमारे जन्मदाता हैं। भगवान विष्णु जिस प्रकार संसार का पालन करते हैं, उसी प्रकार माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण कर उन्हें योग्य बनाते हैं। वहीं भगवान शिव जिस प्रकार बुराइयों का नाश करते हैं, उसी प्रकार माता-पिता अपने बच्चों के भीतर की बुरी प्रवृत्तियों को दूर कर श्रेष्ठ संस्कार प्रदान करते हैं। इसलिए माता-पिता और सद्गुरु की सेवा करना प्रत्येक मनुष्य का परम कर्तव्य है।
कथावाचक ने गोकर्ण एवं धुंधकारी के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि अच्छे संस्कार मनुष्य को सम्मान दिलाते हैं, जबकि माता-पिता का अनादर पतन का कारण बनता है। वहीं भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग के माध्यम से सद्गुरु के महत्व को बताते हुए कहा कि गुरु का सान्निध्य ही जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।
कथा के अंत में श्रद्धालुओं से माता-पिता की सेवा, सद्गुरु के प्रति श्रद्धा, उत्तम संस्कार एवं भगवान की भक्ति को जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में गांव के गणमान्य नागरिक, धर्मप्रेमी श्रद्धालु एवं बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
