संवाददाता। राजेन्द्र बबलू पोखरना
कोटड़ी
चातुर्मास के पावन अवसर पर मेवाड़ गौरव एवं प्रखर वक्ता पूज्य रविन्द्र मुनि म.सा. ने स्थानीय शीतल भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इसे केवल भौतिक सुख-सुविधाओं में व्यतीत करने के बजाय आत्मकल्याण और धर्म साधना में लगाना चाहिए। धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति स्वयं का ही नहीं, समाज का भी कल्याण करता है। उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषाय आत्मा को मलिन करते हैं।

इन विकारों पर संयम, तप, त्याग और स्वाध्याय के माध्यम से विजय प्राप्त कर जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। बाहरी वैभव क्षणिक है, जबकि आत्मा का वैभव शाश्वत है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर झांककर आत्मचिंतन करना चाहिए। रविन्द्र मुनि ने कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, सदाचार और संस्कारों को अपनाने का श्रेष्ठ अवसर है। इस अवधि में अधिकाधिक धर्म आराधना, सामायिक, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय एवं तप के माध्यम से आत्मा को निर्मल बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने परिवार में भी धार्मिक संस्कारों का वातावरण निर्मित करें तथा बच्चों को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ें।
प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे और सभी ने धर्मलाभ प्राप्त किया। अंत में मंगल पाठ एवं मंगलकामना के साथ धर्मसभा का समापन हुआ।
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