मनुष्य हर परिस्थिति में धैर्य, मर्यादाऔर धर्म का पालन करे
श्रीराम-सीता विवाह उपरांत अयोध्या में छाया उल्लास, भजनों पर झूमे श्रद्धालु
भीलवाड़ा, 23 मई। सनातन सेवा समिति के तत्वावधान एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में अधिकमास के अवसर पर चल रहे सेवा-सुमिरन प्रकल्प एवं पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिवस हरिद्वार से पधारे महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन ने भगवान श्रीराम के विवाह उपरांत अयोध्या आगमन एवं वहां छाए हर्षोल्लास के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।
व्यासपीठ से कथा करते हुए स्वामी जगदीश दास उदासीन ने कहा कि जब भगवान श्रीराम, माता सीता सहित चारों भाई अपनी-अपनी अर्धांगिनियों के साथ अयोध्या पहुंचे तो सम्पूर्ण अयोध्या नगरी दीपों, मंगल गीतों और उत्सवों से गूंज उठी। नगरवासियों ने प्रभु के स्वागत में घर-घर बंदनवार सजाए तथा माताओं ने आरती उतारकर नववधुओं का स्वागत किया।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम का जीवन आदर्श, मर्यादा, त्याग और परिवार के प्रति समर्पण का संदेश देता है। विवाह के बाद अयोध्या में चारों भाइयों एवं उनकी पत्नियों के मधुर व्यवहार, माताओं के स्नेह तथा राजमहल के आनंदमय वातावरण का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जहां प्रेम, संस्कार और धर्म होता है, वहीं सच्चा सुख और समृद्धि निवास करती है।
स्वामी जी ने कथा में आगे कहा कि मनुष्य की इच्छा बहुत कुछ होती है, किंतु परमात्मा की इच्छा के आगे किसी की नहीं चलती। उन्होंने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब राजा दशरथ ने अपने कानों के पास सफेद बाल देखे तो उन्हें वैराग्य का भाव आया और उन्होंने गुरु वशिष्ठ से आज्ञा लेकर भगवान श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा कर दी। सम्पूर्ण अयोध्या इस समाचार से आनंदित हो उठी, किंतु ईश्वर की इच्छा कुछ और ही थी। माता कैकेयी ने पूर्व में दिए गए दो वरदान मांगते हुए भगवान श्रीराम के लिए चौदह वर्ष का वनवास तथा भरत के राज्याभिषेक की मांग कर ली। इस प्रसंग के माध्यम से स्वामी जी ने कहा कि प्रभु की लीला और इच्छा के आगे संसार की सभी योजनाएं छोटी पड़ जाती हैं तथा मनुष्य को हर परिस्थिति में धैर्य, मर्यादा और धर्म का पालन करना चाहिए।
कथा के दौरान स्वामी जी ने भजनों एवं चौपाइयों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। “अवध में आनंद भयो, जय सियाराम” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। कथा पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के उद्घोष के साथ धर्मलाभ प्राप्त किया।
आयोजन के अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।
शनिवार को विष्णु यज्ञ एवं रुद्राभिषेक में वर्षा सखरानी एवं गायत्री टेलर ने परिवार सहित आहुतियाँ दी और महादेव का अभिषेक किया।
पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत आश्रम में प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, संकीर्तन, काशी की तर्ज पर गंगा आरती एवं हरिनाम कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो रहे हैं। आश्रम के संत मायाराम और संत गोविन्दराम ने सनातन धर्म के सभी श्रद्धालुओं से पुरुषोत्तम मास में भीलवाड़ा में बह रही धर्मगंगा की त्रिवेणी का लाभ लेने का आग्रह किया है।
