तुतलाती आवाज में बच्चों ने उठाए असावा कॉलोनी के दर्द, पोस्टर पर लिखीं समस्याएं, पालिका तक पहुंची मासूमों की पुकार

शाहपुरा- मूलचन्द पेसवानी
किसी ने सड़क के गड्ढों की पीड़ा बताई, किसी ने अंधेरे रास्तों से लगने वाले डर को शब्दों में पिरोया, तो किसी ने घरों के आसपास उगी झाड़ियों और जमा गंदे पानी से होने वाली परेशानी को पोस्टर पर उकेर दिया। ये आवाजें किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की नहीं, बल्कि उन नन्हे विद्यार्थियों की थीं, जो रोजाना असुविधाओं के बीच अपने स्कूल पहुंचते हैं और खेलते-कूदते हुए भी अपने आसपास की बदहाल व्यवस्था को महसूस करते हैं। उनकी तुतलाती बोली में उठे सवालों ने शाहपुरा नगर पालिका के जिम्मेदारों के सामने वार्ड संख्या 14 की असावा कॉलोनी और नट समाज गांछा बस्ती की समस्याओं को नए अंदाज में रख दिया।
शुक्रवार को ब्राइट माइंड विद्यालय के विद्यार्थियों ने मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर नगर पालिका के मुख्य द्वार पर अनूठे तरीके से प्रदर्शन किया। बच्चों के हाथों में तख्तियां और पोस्टर थे, जिन पर उनके क्षेत्र की समस्याएं लिखी हुई थीं। मासूमों ने अपने शब्दों और भावनाओं के माध्यम से नगर पालिका अध्यक्ष रमेश सेन तथा अधिशासी अधिकारी रिंकल गुप्ता को बताया कि उनके आसपास की सड़कें, अंधेरे रास्ते, गंदा पानी और झाड़ियों से भरा इलाका उनके दैनिक जीवन को किस तरह प्रभावित कर रहा है।
इस दौरान क्षेत्रवासियों की ओर से भी ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के समाधान की मांग की गई। विद्यालय प्रबंधन ने भी असावा कॉलोनी और स्कूल के आसपास की बदहाल स्थिति की ओर नगर पालिका प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
पोस्टर पर बच्चों की पीड़ा, तुतलाती आवाज में व्यवस्था से सवाल
आमतौर पर नगर पालिका तक अपनी समस्याएं पहुंचाने के लिए लोग ज्ञापन देते हैं, धरना-प्रदर्शन करते हैं या जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करते हैं। लेकिन असावा कॉलोनी की समस्याओं को लेकर बच्चों ने जिस तरीके से अपनी बात रखी, उसने इस प्रदर्शन को अलग पहचान दी।
नन्हे विद्यार्थियों ने अपने हाथों में पोस्टर लेकर बताया कि खराब रास्तों से स्कूल आना-जाना मुश्किल होता है। शाम के समय अंधेरा होने से असुरक्षा महसूस होती है। आसपास उगी विलायती बबूल की झाड़ियां रास्तों को घेर रही हैं, वहीं जगह-जगह जमा गंदा पानी मच्छरों की परेशानी बढ़ा रहा है।
बच्चों की मासूम आवाज में कही गई बातें केवल उनकी व्यक्तिगत परेशानी नहीं थीं, बल्कि उस क्षेत्र में रहने वाले परिवारों की रोजमर्रा की मुश्किलों का भी प्रतिबिंब थीं। उनकी अभिव्यक्ति ने यह सवाल खड़ा किया कि जब बच्चे भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझने और उनके समाधान की मांग करने लगे हैं, तो संबंधित व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में और कितनी देर होनी चाहिए?
स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क पर डामरीकरण की मांग
ब्राइट माइंड विद्यालय प्रबंधन की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में स्कूल और असावा कॉलोनी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर डामरीकरण कराने की मांग की गई। प्रबंधन के अनुसार, सड़क की खराब स्थिति के कारण विद्यार्थियों, अभिभावकों और कॉलोनीवासियों को आवागमन में परेशानी होती है।
कॉलोनी के भीतर जाने वाले रास्तों पर भी जगह-जगह गड्ढे होने से दोपहिया वाहनों का निकलना कठिन हो रहा है। सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्थानीय नागरिकों की दैनिक जरूरतों से भी जुड़ी हैं। ऐसे में इन रास्तों की मरम्मत और नियमित रखरखाव क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांग है।
विलायती बबूल और अंधेरे रास्ते बढ़ा रहे परेशानी
क्षेत्र में उगी विलायती बबूल की झाड़ियों को भी बड़ी समस्या बताया गया। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि झाड़ियों के कारण रास्तों से गुजरना मुश्किल होता है। इनकी सफाई नहीं होने से आसपास का क्षेत्र उपेक्षित नजर आता है।
वहीं, असावा कॉलोनी और विद्यालय के आसपास पर्याप्त रोड लाइट नहीं होने से शाम और रात के समय परेशानी बढ़ जाती है। विद्यालय के खेल मैदान तक पहुंचने वाले विद्यार्थियों को भी अंधेरे के कारण दिक्कत होती है। कॉलोनीवासियों के लिए भी रात में इन रास्तों से गुजरना सहज नहीं है।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि झाड़ियों की नियमित सफाई कराई जाए और प्रमुख रास्तों पर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों को स्कूल और खेल मैदान तक पहुंचने में सुविधा मिले तथा नागरिकों को रात के समय आवागमन में राहत मिल सके।
उद्यान है, लेकिन सुविधाओं का इंतजार
विद्यालय के पास नगर पालिका का एक उद्यान भी स्थित है, लेकिन प्रबंधन के अनुसार वहां आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। नतीजतन, कॉलोनी के लोग और विद्यालय के विद्यार्थी इसका समुचित लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
उद्यान का उद्देश्य बच्चों को खेलने, बुजुर्गों को टहलने और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि वहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हों, तो सार्वजनिक स्थान होने के बावजूद उसका उपयोग सीमित रह जाता है। क्षेत्रवासियों ने उद्यान को उपयोगी बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की मांग उठाई है।
गंदा पानी और मच्छरों की समस्या से परेशान परिवार
असावा कॉलोनी में घरों से निकलने वाले गंदे पानी और बारिश के पानी की निकासी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। क्षेत्रवासियों के अनुसार, पानी जमा रहने से दिन और रात दोनों समय परेशानी होती है। खासकर मच्छरों की बढ़ती समस्या के कारण बच्चों और परिवारों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। इसके लिए नालियों की सफाई, पानी की निकासी की उचित व्यवस्था और नियमित निगरानी की आवश्यकता है। केवल अस्थायी सफाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जलभराव के कारणों को दूर करना भी जरूरी है।
पालिका अध्यक्ष और ईओ ने प्राथमिकता से काम कराने की बात कही
बच्चों ने नगर पालिका अध्यक्ष रमेश सेन और अधिशासी अधिकारी रिंकल गुप्ता को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान बच्चों की मासूम अभिव्यक्ति और क्षेत्र की समस्याओं ने जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी ने आने वाले दिनों में इन कार्यों को प्राथमिकता से कराने की बात कही। हालांकि, मौके पर किसी निश्चित समयसीमा या कार्य शुरू होने की स्पष्ट घोषणा नहीं की गई।
अब क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि बच्चों की ओर से उठाई गई यह आवाज केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क, सफाई, रोशनी, जल निकासी और उद्यान से जुड़ी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
मासूमों की पुकार से सामने आई लंबे समय की उपेक्षा
वार्ड संख्या 14 की असावा कॉलोनी और नट समाज गांछा बस्ती में मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है। क्षेत्रवासियों की परेशानी और बच्चों की पहल ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि शहरी विकास का आकलन केवल मुख्य सड़कों और प्रमुख बाजारों से नहीं किया जा सकता। शहर की बाहरी बस्तियों और कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को भी समान सुविधाएं मिलना जरूरी है।
बच्चों ने अपने छोटे-छोटे हाथों से पोस्टर उठाकर बड़ी बात कह दी। उनकी मांगों में न कोई राजनीतिक नारा था और न किसी से व्यक्तिगत शिकायत। उनकी अपेक्षा बस इतनी थी कि वे सुरक्षित रास्तों से स्कूल पहुंच सकें, आसपास सफाई रहे, रात में रोशनी हो और खेलने के लिए उपलब्ध उद्यान उपयोगी बन सके।
अब देखना यह है कि तुतलाती आवाज में उठी इन मासूम मांगों को नगर पालिका प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है। बच्चों के पोस्टर पर लिखे शब्द उस समय सार्थक होंगे, जब असावा कॉलोनी की सड़कें सुधरेंगी, झाड़ियां हटेंगी, रोशनी पहुंचेगी और जलभराव से राहत मिलेगी। यही इस अनूठे प्रदर्शन की वास्तविक सफलता होगी।



