परीक्षा में तनाव नहीं, प्रसन्नचित मन से करें तैयारी : आचार्य हंस चैतन्य जी

उषाकाल में पढ़े हुए पाठ की पुनरावृत्ति से बढ़ती है एकाग्रता, विद्यार्थी के पंच लक्षण बताए
शक्करगढ़
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शक्करगढ़ में शनिवार को आयोजित संस्कार वार्ता में आचार्य हंस चैतन्य जी ने विद्यार्थियों को परीक्षा काल में तनाव से दूर रहकर प्रसन्नचित मन से अध्ययन करने का संदेश दिया। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, संयम और सकारात्मक सोच व्यक्ति को लक्ष्य तक पहुंचाती है।
आचार्य ने विद्यार्थियों को पंच लक्षण बताते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन अनुशासन, जिज्ञासा और निरंतर अभ्यास का समय है। उन्होंने कहा कि पढ़े हुए विषय की उषाकाल में पुनरावृत्ति अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि सुबह का समय अध्ययन और स्मरण के लिए अत्यंत उपयोगी होता है।
उन्होंने एकाग्रता को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि एकाग्र होकर किया गया अध्ययन कम समय में भी अधिक फलदायी होता है। विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर उसी के अनुरूप नियमित अध्ययन करना चाहिए। पढ़ाई के साथ पर्याप्त नींद और संतुलित आहार पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि परीक्षा को बोझ या भय का विषय न बनाएं, बल्कि इसे अपनी तैयारी और क्षमता को साबित करने का अवसर समझें। प्रसन्न मन, संतुलित दिनचर्या, नियमित पुनरावृत्ति और एकाग्र अध्ययन सफलता की मजबूत नींव हैं।



