बिजौलिया में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर सियासी नजरें, कांग्रेस के चार पार्षद दावेदारों की दौड़ में

भाजपा के 12, कांग्रेस के 11 और दो निर्दलीय जीते, अध्यक्ष चुनाव में 13-12 का रहा मुकाबला; 20 नवंबर के बाद खुल सकते हैं सियासी पत्ते
बिजोलिया ।
नगर में पहली बार नगर पालिका का गठन हुआ और पहले ही चुनाव में भाजपा- कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। भाजपा ने अपना बोर्ड तो बना लिया, लेकिन अब नगर की राजनीति में एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। यह चर्चा नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर है। कांग्रेस खेमे में इस पद के लिए चार पार्षदों के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। हालांकि अभी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में संभावित चेहरों और समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
25 सीटों का चुनाव, एक वोट के अंतर से बना बोर्ड
नगर पालिका के पहले चुनाव में कुल 25 वार्डों में भाजपा के 12, कांग्रेस के 11 और दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा को 13 और कांग्रेस को 12 मत मिले। निर्दलीय पार्षद सौभाग्य सिंह और राधेश्याम रेगर के समर्थन से भाजपा बोर्ड बनाने में सफल रही। इस तरह भाजपा ने सत्ता की कमान तो संभाल ली, लेकिन विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच महज एक मत का अंतर रहा। यही समीकरण आने वाले समय में नगर पालिका की राजनीति को दिलचस्प बनाए रख सकता है।
चार नामों पर टिकी कांग्रेस की निगाहें
नेता प्रतिपक्ष के संभावित चेहरे के रूप में कांग्रेस पार्षद दिनेश पालीवाल, भूमिका सुवालका , संजय मालवीय, और रईश पेंटर के नाम चर्चा में हैं। इनमें से किसे जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, यह अभी तय नहीं है। कांग्रेस के सामने ऐसा नेतृत्व चुनने की चुनौती है, जो सभी विपक्षी पार्षदों को साथ लेकर बोर्ड में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सके।
नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी होगी अहम
नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी केवल सत्ता पक्ष का विरोध करने तक सीमित नहीं होती। बोर्ड की बैठकों में जनसमस्याएं उठाना, विकास कार्यों की समीक्षा करना, बजट और प्रस्तावों पर सवाल करना तथा विपक्ष के पार्षदों को एकजुट रखकर जनता की आवाज बुलंद करना उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। सड़क, नाली, सफाई, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष से जवाब मांगने में भी उसकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में इस पद पर बैठने वाला चेहरा आने वाले समय में नगर पालिका की राजनीति में अहम साबित हो सकता है।
20 नवंबर के बाद खुल सकते हैं सियासी पत्ते
फिलहाल नगर पालिका चुनाव संपन्न होने के बाद क्षेत्र में पंचायती राज चुनावों की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। ऐसे में कांग्रेस की निगाहें अब 20 नवंबर को आने वाले पंचायत समिति सदस्य एवं जिला परिषद सदस्य के चुनाव परिणामों पर भी टिकी हैं। माना जा रहा है कि इन चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष के नाम को लेकर अपनी रणनीति और रूपरेखा तय कर सकती है। ऐसे में 20 नवंबर के बाद नगर पालिका में विपक्ष के नेता का चेहरा सामने आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
कम अंतर, बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी
बिजौलिया की पहली नगर पालिका में भाजपा के पास सत्ता की कमान है तो कांग्रेस के पास मजबूत विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका साबित करने का अवसर। अध्यक्ष चुनाव में महज एक मत का अंतर यह दर्शाता है कि यहां राजनीतिक समीकरण कितने करीबी रहे हैं। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष का चयन कांग्रेस के लिए केवल एक पद तय करने का मामला नहीं, बल्कि आने वाले समय में नगर पालिका के भीतर अपनी राजनीतिक मौजूदगी और जनहित के मुद्दों पर पकड़ मजबूत करने का अवसर भी होगा।
अब बस सवाल यही है कि कांग्रेस चार संभावित चेहरों में से किसे विपक्ष की कमान सौंपती है? क्या दिनेश पालीवाल, भूमिका सुवालका , संजय मालवीय या रईश पेंटर में से किसी एक के नाम पर मुहर लगेगी या पार्टी कोई नया चेहरा सामने लाएगी? फिलहाल बिजौलिया की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।






















































