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22 साल की उम्र में हिमांशु पेसवानी बने देश के टॉप 20 इंस्पायरिंग सेल्स एंड मार्केटिंग माइंड्स

शाहपुरा, मूलचन्द पेसवानी
कम उम्र में बड़ा मुकाम हासिल करना हर किसी के बस की बात नहीं होती, लेकिन शाहपुरा मूल के युवा उद्यमी हिमांशु पेसवानी ने यह कर दिखाया है। महज 22 वर्ष की उम्र में हिमांशु पेसवानी को ‘टॉप 20 इंस्पायरिंग सेल्स एंड मार्केटिंग माइंड्स 2026’ की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। यह चयन देशभर के 218 सेल्स और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स में से एआई आधारित स्क्रीनिंग और स्वतंत्र जूरी मूल्यांकन के बाद किया गया।


हिमांशु वर्तमान में जयपुर स्थित डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी एवं बिजनेस कंसल्टेंसी पेसवानी पिक्सल्स के संस्थापक हैं। उनकी एजेंसी विभिन्न स्टार्टअप्स, व्यापारिक संस्थानों और उभरते ब्रांड्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहचान दिलाने, लीड जनरेशन और ऑनलाइन बिक्री बढ़ाने में मदद कर रही है। खास बात यह है कि पेसवानी पिक्सल्स कोई पारिवारिक व्यवसाय नहीं, बल्कि हिमांशु की मेहनत और मार्केटिंग कौशल से खड़ी की गई स्व-स्थापित कंपनी है।

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हिमांशु बताते हैं कि नौवीं कक्षा के दौरान एक शिक्षक ने उनसे कहा था कि “यह पढ़ाई में ध्यान नहीं देगा और आगे चलकर केक की दुकान ही लगाएगा।” उस समय उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन यह बात उनके मन में चुभती रही। आज वही टिप्पणी उनके लिए प्रेरणा बन गई। उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग को केवल नौकरी नहीं, बल्कि व्यवसायिक अवसर के रूप में चुना और कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई।
हिमांशु का कहना है कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कई व्यक्तिगत सुविधाओं का त्याग किया। कई रातें जागकर काम किया, नए-नए स्किल्स सीखे और लगातार खुद को अपडेट किया। यह अवॉर्ड उनके लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि उन तमाम शंकाओं का जवाब है, जो कभी उनकी क्षमता पर उठाई गई थीं।


कम उम्र में बड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हिमांशु पेसवानी आज अपने से दोगुनी उम्र के अनुभवी प्रोफेशनल्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और देशभर के टॉप 20 में जगह बनाना यह दर्शाता है कि उनका काम केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जा रहा है।

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इस उपलब्धि से शाहपुरा सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। व्यापारियों और युवाओं में यह चर्चा है कि हिमांशु ने यह साबित कर दिया है कि उम्र से ज्यादा सोच मायने रखती है। डिग्री से ज्यादा स्किल जरूरी है और नौकरी के साथ-साथ उद्यमिता भविष्य का मजबूत रास्ता है। हिमांशु जैसे युवा आज छोटे व्यापारियों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर उन्हें नए ग्राहक दिलाने में मदद कर रहे हैं। इससे पारंपरिक व्यापार को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

हिमांशु पेसवानी की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए, तो कम उम्र में भी राष्ट्रीय पहचान बनाई जा सकती है। कम उम्र में बिजनेस सोच, डिजिटल स्किल और आत्मविश्वास के दम पर हिमांशु पेसवानी ने यह साबित कर दिया है कि सफलता उम्र नहीं, मेहनत देखती है।

KAPIL SHYAM VIJAY

जहां सोच जवान हो , खबरे बेजुबान नहीं होतीं

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